Saturday, September 5, 2026

दून एक्सप्रेसवे की दीवार झुकी, एंकर प्लेट्स के सहारे टिकाया ढांचा; पिलर भी कमजोर

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भोंपूराम खबरी। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के चंद दिनों बाद ही कस्बे में थाने के सामने दायीं तरफ फ्लाईओवर की दीवार दरक गई। गैप बढ़ने से दीवार में आए झुकाव को रोकने के लिए कार्यदाई संस्था ने आनन-फानन में एंकर प्लेट्स लगा दी। इससे फिलहाल दीवार का दरकना तो थम गया है, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

12 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने 213 किमी लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। खुद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी दिल्ली से कार द्वारा इस पर गणेशपुर तक पहुंचे थे। केंद्र सरकार इस एक्सप्रेसवे को अपनी बड़ी उपलब्धियों में से एक मानकर चल रही है।

लोकार्पण के कुछ दिनों बाद ही फ्लाईओवर की दीवार दरकने से निर्माण पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एनएचएआई के कर्मचारियों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली तब दीवार को गिरने से बचाने के लिए 20 एंकर प्लेट्स लगाकर उसे रोकने का प्रयास किया गया। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल अस्थायी उपाय है। आमतौर पर एंकर प्लेट्स का इस्तेमाल 50 से 100 साल पुरानी या कमजोर दीवारों को सहारा देने के लिए किया जाता है, न कि नई बनी संरचनाओं में।

सहमे हैं दीवार के नजदीक बसे दुकानदार

दीवार के बिल्कुल नजदीक रोजी सैनी, मनीष शर्मा तथा आशीष अग्रवाल आदि व्यापारियों की दुकानें हैं। दुकानदारों का कहना है कि दीवार का झुकाव देखकर डर लग रहा है। आशंका है कि यदि दीवार अचानक गिरती है तो उनके प्रतिष्ठानों और सामान का तो नुकसान होगा ही यहां से गुजरने वाले लोगों पर भी भारी पड़ सकता है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि दीवार की तकनीकी जांच कराकर स्थायी समाधान किया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

एक्सप्रेसवे के पिलर भी मिले थे कमजोर, पहनाई थी जैकेट

एक्सप्रेसवे के गणेशपुर से आसारोड़ी तक बनाए गए वन्य जीव गलियारे की 12 किमी एलिवेटेड रोड के 24 पिलर भी पिछली बरसात के बाद कमजोर पाए गए थे। बाद में इन पिलर को जैकेट पहनाने का काम किया गया था। उस वक्त एनएचएआई के अधिकारियों का तर्क था कि केवल उन पिलरों को अधिक मजबूती दी गई है, जो नदी या पहाड़ों से आने वाले पानी के सीधे मुहाने पर हैं। ताकि भविष्य में बाढ़ आदि आने पर एलिवेटेड रोड की सुरक्षा को कोई खतरा पैदा न हो। यह एलिवेटड रोड 575 पिलरों पर बनाई गई है।

यह बोले अधिकारी

एनएचएआई के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर सचिन शर्मा ने बताया कि जहां इस तरह की संभावनाएं होती हैं वहां इस तरह प्लेट लगाकर लॉक कर दिया जाता है, जिससे मजबूती हो जाती है।

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