भोंपूराम खबरी,पंचकूला। तीसरी कक्षा के बच्चे के हमले से घायल पहली कक्षा की बच्ची को शनिवार को 40 घंटे बाद होश आया है। बच्ची चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती है और उसके चेहरे की हालत ऐसी है कि सर्जरी करनी पड़ेगी। चेहरे, नाक की हड्डी में फ्रेक्चर है और शरीर पर कई चोटें आई हैं।
हरियाणा के पंचकूला में सेक्टर-20 स्थित शहीद मेजर अनुज राजपूत राजकीय संस्कृति मॉडल स्कूल में हुई घटना का सीसीटीवी फुटेज देख पूरी दुनिया का दिल दहल गया है। सवाल अब कार्रवाई होने को लेकर उठ रहे हैं।
इसके लिए किसकी और क्या जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। बेरहम बच्चे पर कार्रवाई होनी चाहिए या फिर उसकी परवरिश करने वाले मां-बाप को सजा मिलनी चाहिए। या फिर जिन स्कूल टीचर्स की बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी बनी है उनके खिलाफ एफआईआर होना ही काफी है।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। समिति में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, पुलिस अधिकारी और विशेष शिक्षक या बाल मनोवैज्ञानिक को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
शिक्षा मंत्री ने कमेटी से जल्द रिपोर्ट मांगी है। पीजीआइ चंडीगढ़ में उपचाराधीन बच्ची के इलाज का सारा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी और परिवार की सहायता के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया गया है।
स्कूल प्रिंसिपल और क्लास इंचार्ज के खिलाफ एफआईआर
अब इस मामले में शनिवार शाम को सेक्टर-20 थाना पुलिस ने स्कूल प्रिंसिपल और क्लास टीचर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।जुवेनाइल जस्टिस (जेजे) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
डीसीपी अदिति सिंह ने मामले में कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस की प्राथमिक जांच में स्कूल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है। इसी आधार पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।
पुलिस अब घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। हमला करने वाले आठ साल के बच्चे की सोमवार को दोबारा पीजीआई में मेंटल मैपिंग करवाई जाएगी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
घटना का सीसीटीवी फुटेज देख दहला पूरी दुनिया का दिल
तीसरी कक्षा का बच्चा मासूम बच्ची को स्कूल की पहली मंजिल पर बने क्लास रूम में बहाने से लेकर जाता है। वह बच्ची के सिर को तीन से चार बार बेंच पर पटकता है। इसके बाल पकड़कर घसीटता है। जमीन पर गिराकर लातें मारता है। बच्ची बुरी तरह सहम जाती है।
इसके बाद बेरहम बच्चा ईंट उठाकर लाता है और बच्ची के चेहरे पर वार करता है। इसके बार बच्ची की छाती पर खड़ा हो जाता है। चेहरे पर लातें मारता है और फिर ईंट से वार करता है। इसी तरह वह कई बार हमला करता है और फिर क्लास रूम से बाहर भाग जाता है। 96 सेकंड लगातार मारपीट का सीसीटीवी फुटेज पूरी दुनिया का दिल दहलाने वाला है
बच्ची अंदर बेहोश पड़ी, किसी को भनक तक नहीं
स्कूल की छुट्टी होने की वजह से कर्मचारी कमरे को ताला लगा देते हैं। किसी को यह भनक तक नहीं होती कि अंदर खून से लथपथ बच्ची बेहोश पड़ी है। जब बच्ची का पिता स्कूल पहुंचता है तो हमला करने वाला बच्चा ही उसे बताता है कि बच्ची कहां है।
इसके बाद पिता खिड़की से जब अपनी मासूम की हालत देखते हैं तो उनकी चीखें निकलती हैं। वे कर्मचारियों और टीचर्स को बुलाते हैं और कमरे का दरवाजा खुलवाते हैं।
बच्ची को कंधे से लगाकर दौड़ते हैं और तुरंत अल्केमिस्ट अस्पताल पहुंचते हैं तो डॉक्टर सरकारी अस्पताल में जाने की बात कहते हैं। पंचकूला के सिविल अस्पताल से बच्ची की हालत देखकर पीजीआई रेफर कर दिया।
टीचर्स लगवाती रही मेहंदी, बच्चों की तरफ नहीं दिया ध्यान
करवाचौथ से एक दिन पहले टीचर्स मेहंदी लगवा रही थी स्कूल में और बच्चों की तरफ कोई ध्यान नहीं था। जब स्कूल की छुट्टी हो गई तो किसी ने पहली मंजिल पर ध्यान नहीं दिया कि वहां कोई है तो नहीं और यह वारदात घटित हो गई।
पिता का दर्द…आज मेरी बेटी के साथ हुआ, कल किसी और के साथ होगा
बच्ची का पिता का कहना है कि जब स्कूल के बच्चों ने बेरहम बच्चे से पूछा कि ऐसा क्यों किया तो उसका जवाब था कि मुझे मजा आता है।बच्ची का पिता पिता कहता है बेरहम बच्चे को नाबालिग कहकर छाेड़ दिया जाएगा।
कमख्त ने मेरी बच्ची को लातों-ईंटों से मारा। मेरी बेटी की हालत देखकर मन करता है कि बच्चे का गला घाेंट दूं। इसके बाद वह कहता है कि मैं तो गरीब आदमी हूं। खाने-कमाने वाला हूं और अगर कल को यह बच्चा किसी और के साथ ऐसा करेगा तो क्या करोगे।
बच्ची के परिजनों समेत स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों में रोष बढ़ गया है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने घटना को दबाने का प्रयास किया। बुधवार को घटना हुई, जोकि अब तूल पकड़ रही है।
शनिवार को अभिभावक स्कूल के बाहर इकट्ठा हुए और कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा किया। स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस ने अभिभावकों को समझा बुझाकर घर भेजा।
बैठ सकता है बच्ची के मन में गहरा डर
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष (चेयरपर्सन) तृप्ति हरिपाल श्योराण ने खुद संज्ञान लिया है। उन्होंने पीजीआई जाकर बच्ची के परिवार से मुलाकात की और उसके इलाज की जानकारी ली। चेयरपर्सन ने चिंता जताई कि इतनी छोटी उम्र में इस तरह के हिंसक हमले का सामना करने से बच्ची के मन में गहरा डर और मानसिक तनाव बैठ सकता है।
इसलिए, शारीरिक इलाज के साथ-साथ उसके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी बहुत ज़रूरी है, ताकि ज़रूरत पड़ने पर उसे काउंसलर की मदद दी जा सके। आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर पूरे मामले की रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड मांगा है।
मामले मे मानवाधिकार आयोग की एंट्री
बच्ची के साथ मारपीट मामले में हरियाणा सरकार की ओर से जांच कमेटी गठित किए जाने के बाद अब हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है। शनिवार को आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और असिस्टेंट रजिस्ट्रार डा. पुनीत अरोड़ा स्कूल पहुंचे। आयोग की टीम ने स्कूल परिसर का दौरा कर घटनास्थल का निरीक्षण किया और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटाई।
हरियाणा के सभी स्कूलों में होगा ऑडिट
शिक्षा मंत्री के निर्देशों के तहत, शिक्षा विभाग अब पंचकूला सहित पूरे हरियाणा राज्य के विद्यालयों में सुरक्षा का एक व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराएगा। इस ऑडिट के माध्यम से विशेष रूप से छोटे बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की देखरेख, सीसीटीवी निगरानी प्रणाली की सक्रियता और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
क्या कहता है कानून
पंचकूला जिला अदालत के एडवोकेट कुलदीप सिंह कुंड्डू के अनुसार, ऐसे मामलों में जुवेनाइल जस्टिस (जेजे) एक्ट के तहत बच्चे की उम्र और मानसिक क्षमता के आधार पर जांच की जाती है।
7 से 12 साल की उम्र के बच्चे द्वारा अपराध किए जाने पर यह देखा जाता है कि उसे अपने कृत्य की प्रकृति, गंभीरता और उसके संभावित परिणामों की कितनी समझ थी। साथ ही, अपराध करने के पीछे उसकी मंशा और सही-गलत का बोध भी जांचा जाता है।
मामला दर्ज होने के बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड जेजे एक्ट की धारा 14 के तहत जांच करता है। जांच में अपराध साबित होने पर एक्ट के प्रावधानों के अनुसार अधिकतम 3 साल तक बच्चे को विशेष गृह (स्पेशल होम) में रखने का आदेश दिया जा सकता है।




