Saturday, October 31, 2026

यहां 82 मकानों पर चला बुलडोजर, अतिक्रमण हटाने के दौरान महिला को आया हार्ट अटैक

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भोंपूराम खबरी,रामनगर। नैनीताल जिले के रामनगर स्थित तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अपर कोसी क्षेत्र के पूछड़ी गांव में शनिवार सुबह वन भूमि से अतिक्रमण हटाने का बड़ा अभियान शुरू हो गया। सुबह करीब 6:30 बजे जिला प्रशासन, वन विभाग और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान कच्चे और पक्के मकानों को ध्वस्त किया जा रहा है। कार्रवाई के बीच एक 45 वर्षीय महिला की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों के मुताबिक, महिला को हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उसे तत्काल रामदत्त संयुक्त चिकित्सालय पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। प्रशासन की यह कार्रवाई अपर कोसी क्षेत्र में फेज-2 के तहत की जा रही है। अभियान में करीब 80 से 82 मकानों को हटाया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर क्षेत्र में भारी पुलिस बल के साथ फायर टीम, वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं। पूरे इलाके को कई सुपर जोन, जोन और सेक्टरों में बांटकर कार्रवाई की निगरानी की जा रही है।

कार्रवाई शुरू होने से पहले ही देर रात कई परिवारों ने अपने मकानों को खुद तोड़ना शुरू कर दिया था। लोग घरों से ईंटें, दरवाजे और अन्य जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाते नजर आए। गौरतलब है कि वर्ष 2025 में फेज-1 के तहत करीब 51 परिवारों को हटाया गया था। फेज-2 में 90 से अधिक परिवारों के मकानों पर कार्रवाई प्रस्तावित थी, लेकिन करीब 9 से 10 परिवारों के मामले उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के चलते उन्हें फिलहाल कार्रवाई से अलग रखा गया है। कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों में भारी मायूसी और चिंता देखने को मिली। महिलाओं और बच्चों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित लोगों का कहना है कि ठंड के मौसम में वे अपने परिवार और बच्चों को लेकर आखिर कहां जाएं। वहीं, महिला फात्मा के पुत्र शादाब ने बताया कि उनका परिवार देर रात से ही घर का सामान हटाने में जुटा था। शनिवार को प्रशासन की कार्रवाई के दौरान उनकी मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें दिल का दौरा पड़ा। मौके पर मौजूद एंबुलेंस से उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल पूछड़ी के अपर कोसी क्षेत्र में प्रशासन का अतिक्रमण हटाओ अभियान जारी है। एक ओर वन भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई चल रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवारों के सामने आशियाना और पुनर्वास का सवाल गंभीर मानवीय चिंता के रूप में सामने आया है।

 

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