Saturday, November 7, 2026

उत्तराखंड की सियासत में ‘जेनी बम’ का धमाका!

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भोंपूराम खबरी,देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही सियासत के पुराने पिटारे से निकला ‘जेनी प्रकरण’ एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में धमाका कर रहा है। 23 साल पुराना यह मामला अब भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासत का बड़ा कारण बन गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान से शुरू हुई जुबानी जंग में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत आमने-सामने आ चुके हैं। अब इस पूरे घटनाक्रम में खुद जेनी के सामने आने से सियासत का पारा और चढ़ गया है।

जेनी की एंट्री ने इस राजनीतिक लड़ाई को नया मोड़ दे दिया है। अब तक नेता एक-दूसरे पर आरोपों के तीर चला रहे थे लेकिन जेनी ने सामने आकर पुराने घटनाक्रम की जांच पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मंत्री हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाते हुए नए सिरे से सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट की मांग उठाई है। डीजीपी दीपम सेठ को शिकायती पत्र सौंपकर उन्होंने अपने बेटे को न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। जेनी ने साफ कहा है कि जब तक बेटे को न्याय नहीं मिलता वह उत्तराखंड आती रहेंगी। दरअसल इस पूरे सियासी तूफान की शुरुआत 24 अक्टूबर को हल्द्वानी में मुख्यमंत्री धामी के उस बयान से हुई थी जिसमें उन्होंने अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर कांग्रेस के हमलों के जवाब में जेनी प्रकरण का जिक्र कर दिया। इसके बाद हरक सिंह रावत ने मोर्चा संभालते हुए भाजपा पर पलटवार किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बयान ने आग में घी डालने का काम किया तो हरक सिंह की डीएनए टेस्ट कराने की चुनौती ने सियासी जंग को और दिलचस्प बना दिया।

अब सवाल सिर्फ पुराने प्रकरण का नहीं बल्कि उस राजनीति का भी है जिसमें 23 साल पुराना मामला चुनावी दहलीज पर फिर सबसे बड़ी बहस बनता दिखाई दे रहा है। भाजपा इसे कांग्रेस को घेरने के मुद्दे के रूप में उठा रही है तो कांग्रेस के नेता पुराने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए जवाब दे रहे हैं। इस बीच जेनी ने नेताओं को उनके नाम पर राजनीति बंद करने की चेतावनी देकर दोनों दलों की बयानबाजी के बीच अपनी बात रख दी है। 2027 का चुनाव अभी दूर है लेकिन उत्तराखंड की सियासत में मुद्दों की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। अंकिता भंडारी प्रकरण के बाद अब जेनी प्रकरण भी राजनीतिक केंद्र में है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि आने वाले दिनों में यह मामला न्याय और जांच की दिशा में आगे बढ़ेगा या चुनावी रण में भाजपा-कांग्रेस के बीच आरोपों का सबसे बड़ा हथियार बनेगा।

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