Friday, September 4, 2026

मुकेश अंबानी की रिलायंस की अमेरिका में एंट्री, टेक्सास में 300 अरब डॉलर की ऑयल रिफाइनरी परियोजना का ट्रंप ने किया ऐलान

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भोंपूराम खबरी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट की घोषणा करते हुए कहा है कि भारत की प्रमुख कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज अमेरिका में 300 अरब डॉलर के विशाल तेल रिफाइनरी प्रोजेक्ट में साझेदारी करेगी। यह रिफाइनरी अमेरिका के टेक्सास राज्य के ब्राउन्सविल क्षेत्र में बनाई जाएगी और इसे अमेरिका में पिछले लगभग 50 वर्षों में बनने वाली पहली बड़ी नई रिफाइनरी बताया जा रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस परियोजना को “अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा निवेश” बताते हुए कहा कि इससे अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने इस निवेश के लिए भारत और रिलायंस का विशेष रूप से धन्यवाद भी दिया।

टेक्सास में बनेगी नई रिफाइनरी

यह विशाल रिफाइनरी टेक्सास के पोर्ट ऑफ ब्राउन्सविल के पास बनाई जाएगी। यह संयंत्र अमेरिकी शेल ऑयल को प्रोसेस करने के लिए तैयार किया जाएगा और इससे अमेरिकी तेल उत्पादन और निर्यात क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार इस प्रोजेक्ट को “अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग” नामक कंपनी के साथ विकसित किया जाएगा। योजना के तहत रिफाइनरी में बड़ी मात्रा में कच्चे तेल को रिफाइन कर पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जो घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी उपयोग किए जा सकते हैं।

300 अरब डॉलर का आर्थिक प्रभाव

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस परियोजना का कुल आर्थिक प्रभाव लगभग 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा होंगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में पहले से कई रिफाइनरी मौजूद हैं, लेकिन यह परियोजना अमेरिका की ऊर्जा रणनीति को मजबूत करने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

रिलायंस की वैश्विक ऊर्जा ताकत

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अम्बानी की कंपनी पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में से एक का संचालन भारत के जामनगर में करती है। इसी अनुभव के कारण अमेरिकी परियोजना में रिलायंस की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा

इस परियोजना को भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक और ऊर्जा सहयोग का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इस निवेश से दोनों देशों के बीच व्यापार और ऊर्जा साझेदारी को नई मजबूती मिल सकती है।

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