Friday, September 4, 2026

महिलाओं की जीत का प्रतीक है महिला समानता दिवस 

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भोंपूराम खबरी, रुद्रपुर।  विश्व महिला समानता दिवस के अवसर पर समाज में पहचान बना चुकी महिलाओं ने इस दिन को महिलाओं की जीत का प्रतीक बताया। महिलाओं का कहना था कि समानता दिवस को 101 साल पूरे हो गए है। इसे दुनिया भर में 26 अगस्त को मनाया जाता है।

कानून ने महिला और पुरुष में भेद न करते हुए दोनों को समान अधिकार दिए। आवास विकास में स्वयं सहायता समूह चलाने वाली कमला देवी ने कहा कि आज भी महिलाओं के अधिकारों को लेकर लोगों के मन में दोहरी मानसिकता होती है। समाज में कुछ लोग महिलाओं का समान अधिकार देने से गुरेज करते है। मुख्य बाजार निवासी रेनू बजाज का कहना था कि महिला अधिकारों के लिए अमेरिका में 1853 से आंदोलन शुरू हुआ था। लगभग 50 सालों तक चली लड़ाई के बाद अमेरिका में महिलाओं को 26 अगस्त 1920 के दिन वोटिंग का अधिकार मिला। इस दिन को याद करते हुए विश्व महिला समानता दिवस मनाया जाने लगा।

समाजसेवी रजनीश बत्रा ने कहा कि भारत के अधिकांश भागों और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए समाज से लड़ना पड़ता है। 2005 में बेटियों को भी सम्पति में बराबर का अधिकार महिलाओँ की दी जाने वाली समानता की बानगी है। इसी के चलते आज महिलाएं सभी क्षेत्रों में पुरुष के साथ और कई क्षेत्रों में पुरुषों के बराबर खड़ी है ।

जिला होमगार्ड कमांडेड प्रतिमा ने कहा कि पहले की अपेक्षा आज कि महिलाएं अधिक जागरूक है। जिसमे केवल शहरों की ही नहीं बल्कि गांवो की महिलाये भी शामिल है। उन्होंने कहा कि आज ममहिलाएं राजनीति, खेलकूद, विज्ञान जैसे कई क्षेत्रों में पुरुषों के समक्ष बराबरी से खड़ी है ।

जिला क्रीड़ा अधिकारी रशिका सिद्द्की ने कहा कि आज कि महिलाएं अपने कौशल के दम पर देश-विदेश में नाम कमा रही है। उन्होंने बताया कि खेल के क्षेत्र में मैरी कॉम, पीवी सिंधु, साईना नेहवाल जैसी कई महिलाओं ने खेल के क्षेत्र में पुरुषों की तरह ही अपनी प्रतिभा से देश का नाम रोशन किया है।

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