Friday, September 4, 2026

उत्तराखण्ड पेयजल निगम का राजकीयकरण करने की कर्मचारियों की मांग

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भोंपूराम खबरी, रुद्रपुर। अधिकारी/कर्मचरी संयुक्त समन्वय समिति के बैनर तले पेयजल निगम में कार्यरत कर्मचारियों ने उत्तराखण्ड पेयजल निगम का राजकीयकरण किये जाने की मांग की। जिसको लेकर उन्होने पेयजल निगम के गेट पर धरना प्रदर्शन भी किया। जिसके संबंध में मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भी जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया गया।

पेयजल निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों ने कार्यालय के गेट पर एकत्रित होकर पेयजल निगम को राजकीय विभाग घोषित किये जाने की मांग की। इस दौरान संयोजक ललित चन्द्र जोशी ने बताया कि उत्तराखण्ड पेयजल निगम व उत्तराखण्ड जल संस्थान का राजकीयकरण व एकीकरण होने से सबसे अधिक लाभ राज्य की जनता होगा। इससे पेयजल की उपादेयता बढ़ेगी। वही अनावश्यक अलाभकारी निर्माण की समस्या से निजात मिलेगा। इसके अलावा राजकीयकरण होने से संबंधित विभागों के मध्य आपसी सामंजस्य बढ़ेगा और जल जीवन मिशन कार्यक्रम का विस्तार व विकास होगा। कहा कि अन्य राज्यों में राजकीय पेयजल विभाग होने से जल जीवन मिशन कार्यक्रम की प्रगति उत्तराखण्ड से बेहतर है। वही इसके बनने से कार्मिकों के वेतन/पेंशन की समस्याओं का हल भी समय से होगा। वही उन्होने मंाग की कि राजकीयकरण होने से पूर्व कार्मिकों/पेंशनरो की वेतन व पेंशन सीधे कोषागार से आहरित किये जाने की व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही जल्द से जल्द पेयजल विभाग का गठन किया जाए। उन्होने कहा कि मांगे पूरी नहीं पर आंदोलन की कार्यवाही अमल में लाई जाएंगी। इस दौरान सुभाष भट्ट, राजेन्द्र मर्तोलिया, जीएस खनायत, श्यामलाल, विपिन, पद्मानंद आदि थे।

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