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Wednesday, February 21, 2024

रिटायरमेंट के बाद डीकंपोज से शुरू की जैविक खेती, अब उत्तराखंड के पूर्व आईजी ने बने मिसाल

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भोंपूराम खबरी। आईएएस और आईपीएस अधिकारी को रिटायरमेंट के बाद विधायक सांसद बनते तो आपने बहुत देखा होगा, लेकिन कुछ अधिकारी ऐसे भी होते हैं जो रिटायरमेंट के बाद ऐसी राहों को चुन लेते हैं, जिसका लाभ आने वाले समय में देश व प्रदेश के हजारों लोगों को मिलता है. उत्तराखंड पुलिस के आईजी के पद से रिटायर हुए आईपीएस अधिकारी पूरन सिंह रावत की कहानी भी कुछ ऐसी है, पूर्व आईजी पूरन सिंह रावत को 2017 में जैविक खेती के बारे में पता चला. फिर उन्होंने इसे अपने सरकारी बंगले के गार्डन में प्रयोग किया और बाद में दस एकड़ जमीन पर जैविक खेती शुरू कर दी. पूर्व आईजी पूरन सिंह रावत द्वारा जैविक खेती का एक सीक्रेट फार्मूला तैयार किया है. इस सीक्रेट फार्मूले से गेहूं की खेती से 15 से 17 कुंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

कुमाऊं परिक्षेत्र के पूर्व आईजी पूरन सिंह रावत ने साल 2017 में अपने सरकारी बंगले से जैविक खेती की शुरुआत की थी. जैविक खेती के अच्छे रिजल्ट आने के बाद पूर्व आईजी पूरन सिंह रावत ने ऊधम सिंह नगर जनपद के दिनेशपुर के ग्राम कोटा कृपाली स्थित अपने दस एकड़ के फार्महाउस वेस्ट डी-कंपोज विषाणु आधारित खाद तैयार कर 2017 से खेती कर रहे हैं. जैविक खेती के दौरान उन्हें कई उतार-चढ़ाव देखने को मिलें, लेकिन पूर्व आईजी पूरन सिंह रावत ने हार नहीं मानी. अब उन्होंने कई ऐसे सीक्रेट फार्मूले तैयार कर लिए हैं, जिससे जैविक खेती को करना काफी आसान हो गया है. इससे उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है. इस सीक्रेट फार्मूले का लाभ अन्य किसानों को भी मिल सकें, इसके लिए पूर्व आईजी पूरन सिंह रावत फार्मूले को पेटेंट कराने पर विचार कर रहे हैं. वही जैविक खेती पर पूरी तरह फोकस करने के लिए दिसंबर 2022 में रिटायरमेंट के बाद से पूर्व आईजी पूरन सिंह रावत अपने परिवार के साथ अपने फार्म हाउस पर शिफ्ट हो गए. शिफ्ट होने के बाद अब यही से जैविक खेती से जुड़ी और रिसर्च भी कर रहे हैं।

बातचीत करते हुए पूर्व आईजी पूरन सिंह रावत ने बताया कि- मैं लिटरेचर और नेचर से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ हूं. जिन बटालियन और जिलें में मुझे स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिला, वहां मैंने पर्यावरण सुधार के लिए काम किये है. साल 2017 में जब मैं नैनीताल में आईजी था तो राष्ट्रीय जैविक अनुसंधान केंद्र द्वारा देशी गाय के गोबर में मौजूद बैक्टीरिया से वेस्ट डी-कंपोजर तैयार किया था. पानी में गुड़ और वेस्ट डीकंपोज डालकर जैविक खाद तैयार कर अपने घर के बगीचे में डाला था, जिसका रिजल्ट अच्छा मिलने के बाद मैंने अपनी दस एकड़ खेती की जमीन पर जैविक खेती शुरू कर दी. उन्होंने बताया कि- पहले साल रिजल्ट काफी अच्छा था, लेकिन धीरे-धीरे उत्पादन गिरने लगा. जिसके बाद मैंने अपने स्तर से अलग-अलग प्रयोग किये और अब कई ऐसे फार्मूले तैयार कर दिये है. सीक्रेट फार्मूले से बढ़े गेहूं का उत्पादन पर पूर्व आईजी पूरन सिंह रावत ने बताया कि- जैविक कृषि करने वाले किसानो को रवि की फसल में एक बीज से अधिक पौधे मिलना काफी मुश्किल होता था, लेकिन मैंने एक ऐसा सीक्रेट फार्मूला तैयार किया है, जिससे इसमें लाभ मिल सके. उन्होने कहा कि- सीक्रेट फार्मूले का उपयोग करके गेहूं के एक बीज से चार से पांच पौधे निकलते हैं. इस बार गेहूं की फसल से प्रति एकड़ 15 से 17 कुंटल उत्पादन होने की उम्मीद है. पूर्व आईजी पूरन सिंह रावत ने बताया कि- मैं विशेषज्ञों से राय ले रहा हूं, इसके बाद अपने फार्मूले को पेटेंट भी कराऊंगा।

फसलों को बेचना चुनौतियों से भरा

जैविक खेती से तैयार फसलों को बेचना चुनौतियों से भरा है. इसपर आईजी पूरन सिंह रावत ने बताया कि- आज जैविक खेती करने वालों के सामने सबसे बड़ी समस्या ये है कि जैविक खेती से तैयार फसल के लिए बाजार नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा कि- सौ प्रतिशत जैविक तरीके से खेती करने में लागत काफी ज्यादा आती हैं, समय से फसल के ना ब्रिकी से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसलिए किसानों को जैविक खेती छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा है.

जैविक खेती से जुड़ी जानकारी के लिए करें संपर्क

अगर आप जैविक खेती से तैयार बासमती चावल, ब्लैक राइस, ब्लैक गेहूं और तराई में होने वाली रेगूलर गेहूं खरीद चाहते हैं या फिर जैविक खेती से जुड़ी कोई जानकारी चाहते हैं. तो आप पूर्व आईजी पूरन सिंह रावत को मोबाइल नं० 9837313208 पर कॉल कर जानकारी ले सकते हैं

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