
भोंपूराम खबरी। यूजीसी से जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय के ताज़ा आदेश को लोकतंत्र और संविधान की विजय बताते हुए उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता एवं पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार डॉ. गणेश उपाध्याय ने कहा कि यह फैसला संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और देश की शिक्षा प्रणाली की रक्षा की दिशा में मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि न्यायालय का हस्तक्षेप इस बात का स्पष्ट संकेत है कि किसी भी सरकार को संविधान की सीमाओं के भीतर रहकर ही निर्णय लेने होंगे। डॉ. उपाध्याय ने कहा कि कांग्रेस नेता, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं सांसद राहुल गांधी लगातार यह चेतावनी देते आए हैं कि बीते 11 वर्षों में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं को कमजोर करने की प्रवृत्ति देखने को मिली है। यूजीसी को लेकर आया सर्वोच्च न्यायालय का आदेश इस बात की पुष्टि करता है कि संविधान से ऊपर कोई सत्ता नहीं है और संस्थागत संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, युवाओं के भविष्य और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े विषयों पर राहुल गांधी द्वारा व्यक्त की गई चिंताएं आज और अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय सरकार को पुनः संविधान के प्रति जवाबदेह बनाता है और यह स्पष्ट करता है कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर एकतरफा निर्णय स्वीकार्य नहीं हो सकते। कांग्रेस प्रवक्ता ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि यह फैसला किसी राजनीतिक दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए है। यदि केंद्र सरकार इस आदेश की भावना को समझते हुए संवैधानिक मूल्यों और जनआकांक्षाओं के अनुरूप कार्य करती है, तो यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत करेगा। डॉ. उपाध्याय ने कहा कि कांग्रेस यूजीसी सहित शिक्षा से जुड़े सभी मुद्दों पर छात्रों, शिक्षकों और देशहित के साथ मजबूती से खड़ी है और संविधान की रक्षा के लिए राहुल गांधी के नेतृत्व में जिम्मेदार और लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।


