Friday, October 16, 2026

साधू बन रावण ने किया सीता हरण,श्री राम विरह में हुए व्याकुल, श्री राम शबरी की हुई भेंट,हनुमान जी बने माध्यम तो दुख हरने को मित्र बने सुग्रीव

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भोंपूराम खबरी। श्री शिव नाटक क्लब द्वारा आयोजित रामलीला मंचन के नवें दिन लीला का *शुभारंभ अमर योग क्लब के संस्थापक समाजसेवी अशोक अदलखा,अदलखा ग्लास स्टोर के स्वामी भूषण अदलखा,योग गुरु अशोक कालरा एवं गुरु माँ इंटरप्राइज़ के स्वामी रमेश ढ़ीगड़ा द्वारा* संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया, उनके साथ अमर योग क्लब से सुरेंद्र मिद्धा, सतीश मिद्धा,मदन लाल मक्कड़,प्रभास स्वर्णकार,जुगनू अरोरा,रवि काकरान,सुनील अनन्द,सनी अरोरा, पवन डाबरा,राजीव अनेजा,विजय फुटेला,जतिन नागपाल,हरीश गुंबर,विजय अग्रवाल,सुषमा अग्रवाल,राजकुमार सीकरी,विजय राणा,सोनू कपूर,आकाश भुसरी,हरीश गाबा आदि का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।

साधू बन रावण ने किया सीता हरण,श्री राम विरह में हुए व्याकुल, श्री राम शबरी की हुई भेंट,हनुमान जी बने माध्यम तो दुख हरने को मित्र बने सुग्रीव

*योग गुरु अशोक कालरा ने प्रभु राम की चर्चा करते हुए कहा की श्री रामलीला मंचन हमें जीवन जीने की सीख प्रदान करना है कि कैसी भी परिस्थिति हो हमें हर परिस्थिति में प्रसन्न एवं सहनशील रहना चाहिए प्रभु राम का नाम लेने मात्र से ही समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं राम का नाम एक ऐसा नाम है जिसके सिमरन से मनुष्य के जीवन से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन भाव से पार हो जाता है,सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने के लिए इस प्रकार के आयोजन हमेशा होते रहने चाहिए उन्होने अंगद एवं अक्षय कुमार का प्रसंग सुनाकर राम भक्तों में बहुत प्रशंसा बटोरी , उन्होने श्री शिव नाटक क्लब को बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया और भविष्य मे और अछे आयोजन हेतू अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की*

साधू बन रावण ने किया सीता हरण,श्री राम विरह में हुए व्याकुल, श्री राम शबरी की हुई भेंट,हनुमान जी बने माध्यम तो दुख हरने को मित्र बने सुग्रीव

श्री शिव नाटक क्लब के पदाधिकारियों द्वारा सभी अतिथियों का अंग वस्त्र पहनाकर एवं माला पहनाकर स्वागत किया गया एवं उनको स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया

साधू बन रावण ने किया सीता हरण,श्री राम विरह में हुए व्याकुल, श्री राम शबरी की हुई भेंट,हनुमान जी बने माध्यम तो दुख हरने को मित्र बने सुग्रीव

रामलीला मंचन में रावण रथ में सवार होकर पंचवटी में पहुंचता है और वहां जाकर देखता है कि इस रूप में सीता का हरण नहीं किया जा सकता तो वह साधु रूप बनाता है और सीता को भिक्षा के लिए कहता है और जैसे ही माता सीता भिक्षा के लिए कुटिया में जाती है तो वह कुटिया में प्रवेश करने की कोशिश करता है लेकिन लक्ष्मण रेखा के कारण वह कुटिया में प्रवेश नहीं कर पाता तो वह बाहर आसन लगा लेता है और सीता को बाहर ही भिक्षा लाने को कहता है जैसे ही माता सीता बाहर आती है तो रावण अपने वास्तविक रूप में आकर और सीता का हरण करके ले जाता है प्रभु श्री राम जानकी को कुटिया में न पाकर व्याकुल होते हैं और विलाप करते हैं जंगल जंगल फिरते हैं वहां पर उनकी भेंट शबरी से होती है शबरी उनको झूठे बेर खिलाती है और उनको सुग्रीव से मिलने के लिए कहती है प्रभु श्री राम जी की हनुमान जी से भेंट होती है हनुमान जी द्वारा सुग्रीव जी से प्रभु श्री राम जी की मित्रता कराई जाती हैं,श्री रामलीला के मंचन में रावण की भूमिका अंशुल गुलाटी,साधू रावण नरेश घई,राम की भूमिका अभिनव अनेजा,लक्ष्मण रवि कक्कड़,सीता नैतिक तनेजा,जटायु दीपांशु धानिक,शबरी सन्नी घई,सुग्रीव विशान्त भसीन एवं हनुमान की भूमिका सन्नी कक्कड़ ने निभाई *मंच संचालन जॉली कक्कड़ द्वारा ने किया*

आज रात्री के मंचन मे बाली वध,सीता की खोज,अशोक वाटिका,रावण सीता संवाद,हनुमान जी द्वारा अशोक वाटिका को उजाड़ना, अक्षय कुमार वध एवं मेघनाद द्वारा हनुमान को ब्रहम फांस में बांधना तक के लीला का मंचन दिखाया जाएगा

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