
भोंपूराम खबरी। मुख्यमंत्री के ‘जीरो टॉलरेंस’ और सरकारी भूमियों को कब्जामुक्त कराने के संकल्प के तहत नगर निगम प्रशासन ने रुद्रपुर के गंगापुर मार्ग स्थित शैलजा फार्म में वर्षों से काबिज अवैध साम्राज्य को जमींदोज कर दिया।

तड़के शुरू हुई इस बड़ी कार्रवाई में करीब 6 एकड़ बेशकीमती सरकारी जमीन को अवैध कब्जाधारकों के चंगुल से छुड़ा लिया गया। जेसीबी मशीनों ने मौके पर बाबा द्वारा बनाई गई झोपड़ियों और अवैध निर्माणों को कुछ ही घंटों में मलबे में तब्दील कर दिया। पूरी कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दौरान पूरा शैलजा फार्म छावनी में तब्दील रहा और आसमान से ड्रोन कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी गई। नगर आयुक्त शिप्रा जोशी पाण्डेय और सहायक नगर आयुक्त राजू नबियाल के नेतृत्व में निगम की टीम तड़के ही पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गई थी। नगर निगम को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि शैलजा फार्म की सरकारी भूमि पर बाबा बालक राम ने अवैध रूप से झोपड़ियां डालकर कब्जा कर रखा है और वहां धार्मिक गतिविधियों की आड़ में अतिक्रमण का विस्तार किया जा रहा है। टीम के साथ कोतवाल मनोज रतूड़ी और ट्रांजिट कैम्प कोतवाली प्रभारी मनोज पाण्डे भारी पुलिस फोर्स के साथ मुस्तैद रहे। कार्रवाई शुरू होते ही बाबा बालक राम ने टीम का रास्ता रोकने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तुरंत हिरासत में लेकर कोतवाली भेज दिया। प्रशासन ने मौके पर पहुंचते ही सबसे पहले अवैध रूप से डाली गई झोपड़ियों को खाली कराया। बाबा का सारा सामान सुरक्षित निकालकर निगम ने अपने कब्जे में लिया, जिसके बाद दो मशीनों ने अतिक्रमण को ढहाना शुरू किया। देखते ही देखते सालों पुराना अवैध कब्जा साफ हो गया। इसके तुरंत बाद नगर आयुक्त ने भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घेराबंदी के निर्देश दिए। निगम के कर्मचारियों ने आनन-फानन में टीन शेड लगाकर 6 एकड़ भूमि की हदबंदी कर दी और वहां सरकारी स्वामित्व का बोर्ड लगा दिया गया। सुरक्षा के मद्देनजर गंगापुर मुख्य मार्ग से शैलजा फार्म की ओर आने वाले सभी संपर्क मार्गों को रस्सी लगाकर बंद कर दिया गया था। कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विवाद या झूठे आरोपों से बचने के लिए नगर निगम ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। पूरी ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई और ड्रोन कैमरों से पूरे भूखंड की मैपिंग की गई। अधिकारियों का कहना है कि यह जमीन अब नगर निगम के सुरक्षित डेटाबेस में शामिल है और इसका उपयोग भविष्य में जनहित की बड़ी योजनाओं के लिए किया जाएगा।


