भोंपूराम खबरी,देहरादून। वन्यजीवों की सुरक्षा और तस्करी रोकने की जिम्मेदारी संभालने वाले वन विभाग के अपने ही स्टोर से हाथी दांत गायब हो गए। लैंसडाउन वन प्रभाग की लालढांग रेंज में सामने आए इस मामले ने विभाग की निगरानी और रिकॉर्ड व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि मामला सामने आने के कई दिन बाद भी वन मुख्यालय यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि कितने हाथी दांत गायब हैं और उनका कुल वजन कितना था।
दरअसल, प्रदेशभर के वन प्रभागों में हाथी दांतों के सत्यापन के निर्देश दिए गए थे। इसी दौरान लालढांग रेंज के स्टोर में रखे हाथी दांतों के रिकॉर्ड और वास्तविक उपलब्धता में अंतर मिला। शुरुआती जानकारी में पांच हाथी दांत गायब होने की बात सामने आई है। वन विभाग के स्टोर में वन्यजीवों के अवशेष उन मामलों में सुरक्षित रखे जाते हैं, जो न्यायालय में विचाराधीन होते हैं। ऐसे में लंबे समय से रखे दांतों का गायब होना विभागीय निगरानी पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ नीना ग्रेवाल ने भी स्वीकार किया कि अभी गायब दांतों की संख्या और उनके वजन का सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में सत्यापन के निर्देश दिए गए थे, इसी दौरान लालढांग रेंज में दांत गायब होने का मामला सामने आया।
मामले में वन विभाग ने जांच कमेटी गठित करने के साथ यमकेश्वर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। हालांकि, जांच शुरू होने के बावजूद मुख्यालय स्तर पर अब तक पूरी जानकारी जुटाई नहीं जा सकी है। इस मामले ने वन विभाग की उस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके तहत वन्यजीवों के अवशेषों को सुरक्षित रखने और उनका नियमित हिसाब रखने की जिम्मेदारी तय है।




