
भोंपूराम खबरी। साइबर ठगों ने अब डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर एक महिला से सवा करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी ठगी को अंजाम दिया है। ठगों ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) का अधिकारी बताकर महिला को उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग होने और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी।

घबराहट में आकर महिला ने ठगों द्वारा बताए गए खाते में अपनी जीवन भर की पूंजी जमा कर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अल्मोड़ा जनपद के दनिया थाना क्षेत्र स्थित मिर्ताेला आश्रम निवासी चित्र अÕयर साह पत्नी राजेश साह ने कुमाऊं परिक्षेत्र के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता के अनुसार, 11 दिसंबर 2025 से 6 जनवरी 2026 के बीच उनके मोबाइल नंबरों पर विभिन्न अज्ञात नंबरों से व्हाट्सएप कॉल आई। फोन करने वालों ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया का अधिकारी बताया। जालसाजों ने महिला से कहा कि उनका आधार कार्ड एक बैंक खाते से लिंक है, जिसमें 5000 से अधिक लोगों ने संदिग्ध रूप से पैसे डाले हैं और उन सभी लोगों ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। ठगों ने कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया और सख्त हिदायत दी कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, वह किसी से बात नहीं करेंगी। फोन पर ही नजर रखते हुए ठगों ने कहा कि यदि उन्होंने किसी को इस बारे में बताया तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जांच प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए आरोपियों ने महिला को झांसा दिया कि उन्हें अपने बैंक खाते की सारी धनराशि ‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट’ में डालनी होगी, जो जांच के बाद वापस कर दी जाएगी। अत्यधिक मानसिक दबाव और घबराहट के चलते पीड़िता ने 31 दिसंबर 2025 को अपने एचडीएफसी बैंक खाते से 1,20,18,000 (एक करोड़ बीस लाख अठारह हजार) रुपये चेक के माध्यम से ठगों द्वारा बताए गए आईसीआईसीआई बैंक के खाते में स्थानांतरित कर दिए। पैसे भेजने के बाद जब उन्हें संदेह हुआ और मामले की जानकारी जुटाई, तो उन्हें अहसास हुआ कि वे साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो चुकी हैं। साइबर थाना पुलिस ने धारा 318(4) बीएनएस और 66डी आईटी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। पुलिस अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को खंगाल रही है, जिनके जरिए इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया।


