
भोंपूराम खबरी,देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई से जांच कराने की संस्तुति के बाद भी मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है। कांग्रेस ने कहा है कि बिना सिटिंग जज की निगरानी के सीबीआई जांच कराने का निर्णय, सरकार की ओर से मामले को उलझाने की कोशिश हो सकता है। वहीं इस बीच वीआईपी के खिलाफ देहरादून के वसंत विहार थाने में एफआईआर दर्ज होने से मामला और गर्मा गया है।

यह मामला पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि अंकिता प्रकरण में प्रभावशाली लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच अब तक नहीं हो पाई। उनकी शिकायत पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है, जिससे चर्चाओं ने फिर जोर पकड़ लिया है।
शनिवार को कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार शुरू से ही जांच को दबाने और भटकाने में लगी रही। उन्होंने मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि सीबीआई जांच के लिए भेजे गए पत्र में किन-किन बिंदुओं को शामिल किया गया है और क्या इसमें कथित अति महत्वपूर्ण व्यक्ति की जांच भी शामिल है।
गोदियाल ने कहा कि सरकार जानबूझकर वीआईपी एंगल को उलझा रही है, जबकि स्पष्ट है कि इसी कारण यह जघन्य हत्या हुई। उन्होंने कहा कि समयबद्ध, पारदर्शी और न्यायपूर्ण जांच हो तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि वनंतरा रिजॉर्ट में सबूत क्यों मिटाए गए, स्थानीय विधायक की क्या भूमिका रही और किसके आदेश पर बुल्डोज़र चलाया गया। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार अंकिता के लिए आवाज उठाने वालों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज कर उन्हें प्रताड़ित कर रही है। कांग्रेस ने मांग की कि ऐसे मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं।
अब सीबीआई जांच और अति महत्वपूर्ण व्यक्ति पर दर्ज एफआईआर और राजनीतिक घमासान के बीच अंकिता हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। जनता इंतजार कर रही है कि सच कब सामने आएगा और अंकिता को न्याय कब मिलेगा।


