भोंपूराम खबरी। सर्बिया में चुनाव के बाद राजनीतिक बदलाव के बीच मीडिया संस्थानों को लेकर विरोध तेज हो गया है. सोमवार शाम प्रदर्शनकारी निजी न्यूज चैनल इंफॉर्मर टीवी (Informer TV) के न्यूजरूम में घुस गए और उसके एडिटर-इन-चीफ ड्रैगन वुचिचेविच की गिरफ्तारी की मांग करने लगे. घटना के दौरान चैनल की लाइव कवरेज भी बाधित हुई. इसी बीच हजारों लोग लगातार दूसरी रात सड़कों पर उतरे और छात्र नेतृत्व वाली ‘स्टूडेंट लिस्ट’ की चुनावी जीत का जश्न मनाया।
इंफॉर्मर टीवी के लाइव फुटेज में करीब 30 प्रदर्शनकारी न्यूजरूम में दाखिल होते और संपादक वुचिचेविच के आसपास जुटते दिखाई दिए. कुछ प्रदर्शनकारियों ने ‘आजाद सर्बिया में ऐसा ही होता है’ और ‘वुचिच कहां है?’ जैसे नारे लगाए. वहीं, कुछ लोगों ने संपादक की गिरफ्तारी की मांग की. सर्बिया के पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच के 14 साल के सत्ता प्रभाव के खत्म होने के बाद यह घटना सामने आई है.
स्टूडेंट लिस्ट की जीत के बाद सत्ता परिवर्तन की चर्चा
‘स्टूडेंट लिस्ट’ भ्रष्टाचार विरोधी छात्र आंदोलन से उभरी है. रविवार को मिली चुनावी जीत को सर्बिया की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, इस आंदोलन का कोई स्पष्ट रूप से स्थापित नेता नहीं है. ऐसे में नए प्रधानमंत्री और सरकार के अन्य वरिष्ठ पदों पर किसे जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर सवाल बने हुए हैं.
छात्र आंदोलन ने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की
स्टूडेंट लिस्ट के प्रमुख उम्मीदवार और हृदय रोग विशेषज्ञ इलिया स्रदानोविच ने समर्थकों से शांत रहने की अपील की है. इंस्टाग्राम पर जारी वीडियो में उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक सभी लोग संयम और गरिमा बनाए रखें तथा किसी भी तरह की हिंसा से बचें. उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन अपने समर्थकों से इसी व्यवहार की अपेक्षा करता है.
पत्रकार संगठन ने इंफॉर्मर टीवी का लाइसेंस रद्द करने की मांग की
सर्बिया के स्वतंत्र पत्रकार संघ ने मंगलवार को इंफॉर्मर टीवी का प्रसारण लाइसेंस वापस लेने के लिए आवेदन देने की घोषणा की. संगठन ने चैनल पर कानून और प्रसारण संबंधी नियमों के व्यवस्थित उल्लंघन का आरोप लगाया है. दूसरी ओर, वुचिचेविच ने दावा किया कि नई राजनीतिक ताकत उन मीडिया संस्थानों को चुप कराना चाहती है, जो उसकी आलोचना करते हैं. उन्होंने रॉयटर्स से कहा कि स्टूडेंट लिस्ट की सत्ता के पहले ही दिन मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश हो रही है.
वुचिच ने प्रेस की आजादी पर हमले का आरोप लगाया
सर्बिया के पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच ने इंफॉर्मर टीवी के न्यूजरूम में हुई घटना की निंदा की. उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आजादी और प्रेस स्वतंत्रता पर हमला बताया. वुचिच पहले पूर्व सर्बियाई नेता स्लोबोदान मिलोशेविच की सरकार में सूचना मंत्री रह चुके हैं. उनके कार्यकाल में देश के मीडिया पर सरकार के प्रभाव को लेकर लगातार सवाल उठते रहे.
पिंक टीवी के बाहर भी जुटे प्रदर्शनकारी
सोमवार शाम बेलग्रेड में प्रदर्शनकारियों का एक समूह पिंक टीवी के बाहर भी जमा हुआ. यह निजी चैनल वुचिच का समर्थक माना जाता है. पुलिस ने चैनल की इमारत के आसपास घेराबंदी कर दी. चुनाव के बाद मीडिया संस्थानों को लेकर बढ़ती गतिविधियों ने देश में पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर बहस को फिर तेज कर दिया है.
सरकारी प्रसारक ने दर्शकों से मांगी माफी
इस बीच, सर्बिया के उत्तरी वोजवोडिना क्षेत्र के सार्वजनिक प्रसारक आरटीवी ने अपने शाम के समाचार बुलेटिन की शुरुआत दर्शकों से माफी मांगकर की. चैनल ने स्वीकार किया कि एकतरफा और बिना आलोचनात्मक जांच वाली रिपोर्टिंग के कारण वह अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पाया. इस कदम ने हंगरी के जुलाई में हुए एक ऐसे ही घटनाक्रम की याद दिलाई, जब वहां के सरकारी टीवी चैनल ने वर्षों तक गलत जानकारी देने के लिए दर्शकों से माफी मांगी थी.
प्रेस स्वतंत्रता को लेकर सर्बिया पर उठते रहे हैं सवाल
सर्बिया में मीडिया की आजादी और टीवी चैनलों पर राजनीतिक विरोधियों के साथ असमान व्यवहार को लेकर लंबे समय से आलोचना होती रही है. रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के 2026 वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में सर्बिया 180 देशों में 104वें स्थान पर रहा, जो उसकी अब तक की सबसे खराब रैंकिंग बताई गई है. चुनाव निगरानी संस्था क्र्टा के अनुसार, देशभर में प्रसारण करने वाले टीवी चैनलों ने राजनेताओं को दिए गए कुल प्रसारण समय का करीब तीन-चौथाई हिस्सा सरकार के प्रतिनिधियों को दिया. संस्था ने यह भी कहा कि स्टूडेंट लिस्ट का जिक्र होने के 80 प्रतिशत से अधिक मामलों में उसे नकारात्मक रूप में पेश किया गया.
नई सरकार और मीडिया के रिश्तों पर रहेगी नजर
चुनाव के बाद हुए प्रदर्शन और प्रसारण नियमों में बदलाव की मांग ने सर्बिया के मीडिया परिदृश्य को फिर चर्चा में ला दिया है. अब नई राजनीतिक नेतृत्व व्यवस्था किस तरह मीडिया संस्थानों के साथ व्यवहार करती है, खासकर पूर्व सरकार के समर्थक माने जाने वाले चैनलों के मामले में, इस पर नजर रहेगी. साथ ही प्रेस की स्वतंत्रता और राजनीतिक निष्पक्षता सुनिश्चित करने की चुनौती भी नई सरकार के सामने होगी.




