भोंपूराम खबरी, रुद्रपुर। किसी परिजन को खोने का गम किसी भी इंसान के लिए असहनीय होता है, लेकिन इसी दुख की घड़ी में यदि कोई दूसरों के जीवन में उजाला भरने का संकल्प ले, तो वह मानवता की मिसाल बन जाता है। रुद्रपुर में एक ऐसी ही भावुक पहल देखने को मिली, जहां महिला के निधन के बाद परिजनों ने नेत्रदान कर उनकी आंखों से दूसरों की जिंदगी में रोशनी की उम्मीद जगाई।
रुद्रपुर निवासी 50 वर्षीय राजकुमारी आर्य का गुरुवार को हृदयाघात के कारण निधन हो गया। उनके निधन से परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। इस कठिन समय में परिजनों ने दुख को मानवता की सेवा में बदलने का निर्णय लिया और नेत्रदान के लिए सहमति दी। इसके बाद सीआर मित्तल आई रिट्रीवल सेंटर की टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी की।
परिजनों का यह निर्णय उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है, जो आंखों की रोशनी खो चुके हैं। नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया जरूरतमंदों के प्रत्यारोपण में उपयोग किए जा सकते हैं। एक व्यक्ति का नेत्रदान दो लोगों के जीवन में उजाला लाने का माध्यम बन सकता है।
राजकुमारी आर्य अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके परिजनों का यह मानवीय निर्णय उनके जाने के बाद भी उन्हें दूसरों की आंखों में जीवित रखेगा। दुख की इस घड़ी में लिया गया यह फैसला समाज को संदेश देता है कि मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी भरने का अवसर मिलता है।




