भोंपूराम खबरी। रुद्रपुर में अनसुनी आवाज के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार रूपेश कुमार सिंह के साथ हुई मारपीट की घटना बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। मैं फिलहाल देहरादून में हूं। आज सुबह इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली, जिसने प्रदेश की कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पत्रकार पर हमला होता है और कार्रवाई हमलावरों के बजाय पत्रकार के खिलाफ ही गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करके की जाती है। आखिर यह कैसा न्याय है? क्या अब सत्ता से सवाल पूछना और सरकार की सच्चाई जनता तक पहुंचाना अपराध हो गया है?
कल रुद्रपुर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान खाली कुर्सियों की खबर प्रसारित करने के बाद रूपेश कुमार सिंह के साथ हुई यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। उनके फेसबुक चैनल अनसुनी आवाज का डिलीट हो जाना भी पूरे प्रकरण को और संदिग्ध बनाता है। आखिर सच दिखाने वाले पत्रकार की आवाज दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है?
भाजपा सरकार में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को डराने, दबाने और कुचलने का प्रयास लगातार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बनता जा रहा है। जो सरकार आलोचना सुनने का साहस नहीं रखती, वह लोकतंत्र की मूल भावना को ही कमजोर करती है।
मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि कांग्रेस पार्टी इस अन्याय के खिलाफ चुप बैठने वाली नहीं है। जिला कांग्रेस कमेटी पूरी मजबूती के साथ रूपेश कुमार सिंह और पत्रकारिता जगत के साथ खड़ी है।
हमारी मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, पत्रकार पर हमला करने वालों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए और पत्रकार के विरुद्ध दर्ज मुकदमे को निरस्त किया जाए।
कलम की आवाज को लाठी और मुकदमों के दम पर दबाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला किसी एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र और जनता के जानने के अधिकार पर हमला है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




