भोंपूराम खबरी। पशु संवेदनशील और जीवित प्राणी हैं, न कि वैज्ञानिक प्रगति के नाम पर शोषण की जाने वाली प्रयोगशाला की वस्तुएँ।”प्रस्तावित पशु क्रूरता निवारण (प्रयोग, प्रजनन एवं प्रयोगशाला पशुओं के व्यापार का नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण) नियम, 2026 के प्रारूप को लेकर पशु कल्याण के प्रति संवेदनशील नागरिकों से अपनी आपत्तियाँ एवं सुझाव दर्ज कराने की अपील की जाती है।
भारत सरकार द्वारा अधिसूचना G.S.R. 864(E), दिनांक 30 सितंबर 2026 के माध्यम से जारी इस प्रारूप पर आपत्ति एवं सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 5 नवंबर 2026 बताई गई है।
वैज्ञानिक प्रगति आवश्यक है, लेकिन इसके साथ पशुओं के प्रति दया, संवेदनशीलता और उनके कल्याण की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। किसी भी वैज्ञानिक अनुसंधान के नाम पर पशुओं को अनावश्यक दर्द, पीड़ा या कष्ट नहीं दिया जाना चाहिए।
इस संबंध में प्रमुख माँगें निम्नलिखित हैं:
1. बंदर और जंगली जीव-आवारा एवं सामुदायिक कुत्तों की सुरक्षा: किसी भी आवारा या सामुदायिक कुत्ते को बचाव, टीकाकरण या नसबंदी कार्यक्रम से हटाकर प्रयोगों में इस्तेमाल न किया जाए। ऐसे प्रयोगों के लिए सख्त अनुमति एवं स्वतंत्र नैतिक समीक्षा अनिवार्य होनी चाहिए।
2. प्रयोगों की स्वतंत्र समीक्षा: कुत्तों, गैर-मानव प्राइमेट्स तथा अन्य निर्दिष्ट बड़े पशुओं पर किए जाने वाले आक्रामक प्रयोगों की स्वतंत्र जाँच एवं आवश्यक केंद्रीय मंजूरी सुनिश्चित की जाए।
3. बेहोशी एवं दर्द निवारण: प्रत्येक आवश्यक आक्रामक प्रक्रिया के दौरान उपयुक्त एनेस्थीसिया, दर्द निवारक उपचार, पशु चिकित्सकीय निगरानी और प्रक्रिया के बाद उचित देखभाल अनिवार्य की जाए।
4. पुनर्वास एवं आजीवन देखभाल: प्रयोग समाप्त होने के बाद पशुओं को असहाय या लावारिस न छोड़ा जाए। जहाँ आवश्यक हो, उनके पुनर्वास, उपचार और शेष जीवन की देखभाल के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
5. स्वतंत्र निरीक्षण: पशु प्रयोगशालाओं का स्वतंत्र निरीक्षण किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर बिना पूर्व सूचना निरीक्षण की व्यवस्था हो तथा पशु कल्याण संबंधी उल्लंघनों की निष्पक्ष जाँच की जाए।
6. वैकल्पिक वैज्ञानिक विधियों को प्राथमिकता: जहाँ वैज्ञानिक रूप से मान्य और उपयुक्त गैर-पशु परीक्षण विधियाँ उपलब्ध हों, वहाँ उन्हें प्राथमिकता दी जाए। पशु प्रयोगों की आवश्यकता का उचित वैज्ञानिक औचित्य दर्ज किया जाए।
7. पारदर्शिता एवं जवाबदेही: प्रयोगों में इस्तेमाल किए गए पशुओं की संख्या, प्रयोगों की गंभीरता, पशुओं की मृत्यु, पुनर्वास और नियमों के उल्लंघन से संबंधित जानकारी की रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए।
नागरिकों से अपील
*सभी पशु प्रेमियों, सामाजिक संगठनों, पशु कल्याण कार्यकर्ताओं एवं जागरूक नागरिकों से अपील है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपनी आपत्तियाँ एवं सुझाव ईमेल के माध्यम से भेजें।*
*ईमेल: CPCSEA-MEF@GOV.IN*
*अंतिम तिथि: 5 नवंबर 2026*
आपका एक सुझाव पशु कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। आइए, वैज्ञानिक प्रगति के साथ पशुओं के प्रति करुणा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए अपनी आवाज उठाएँ।
“विज्ञान का उद्देश्य जीवन को बेहतर बनाना है, न कि किसी जीव को अनावश्यक पीड़ा देना।”




