Saturday, September 5, 2026

दून में कश्मीरी युवकों को रॉड से पीटा,आरोपी को लिया हिरासत में

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भोंपूराम खबरी। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में दो कश्मीरी युवकों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना में 18 वर्षीय दानिश और उसका नाबालिग रिश्तेदार घायल हुए हैं।

नाबालिग युवक के हाथ में फ्रैक्चर और सिर में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि दानिश को भी शरीर के विभिन्न हिस्सों में चोटें लगी हैं। दोनों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

घटना बुधवार शाम की बताई जा रही है, जब दोनों युवक बाजार में एक दुकान से सामान खरीदने पहुंचे थे।

घायलों का आरोप है कि दुकानदार को युवकों की पहचान और कश्मीर से होने की जानकारी मिलने के बाद वह भड़क गया और गाली-गलौज करते हुए मारपीट पर उतर आया। आरोप है कि इसके बाद मौके पर मौजूद कुछ अन्य लोग भी इकट्ठा हो गए और लाठी-डंडों व लोहे की रॉड से दोनों युवकों पर हमला किया गया। पीड़ितों ने मारपीट में एक महिला की मौजूदगी का भी दावा किया है।

 

पुलिस ने बताया : व्यक्तिगत विवाद, आरोपी हिरासत में

 

पीड़ितों की शिकायत पर कोतवाली विकासनगर में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मुख्य आरोपी दुकानदार संजय यादव को हिरासत में ले लिया।

 

देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने बताया – “प्राथमिक जांच में यह मामला दुकान पर हुए आपसी विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है। इसका किसी धर्म, जाति या क्षेत्रीय पहचान से संबंध नहीं पाया गया है। आरोपी को हिरासत में लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।”

एसएसपी के अनुसार, दोनों युवक अपने पिता के साथ पोंटा साहिब में किराए पर रहते हैं और छुट्टियों में वहीं आए हुए थे। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने घायलों का मेडिकल कराया, जिसमें सभी जांच रिपोर्ट सामान्य पाई गईं।

पीड़ितों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और हमलावर को हिरासत में लेकर मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सुसंगत धाराओं में न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से भी यह स्पष्ट हुआ है कि घटना में कोई और व्यक्ति शामिल नहीं था और यह एक व्यक्तिगत विवाद था।

 

 

 

छुट्टियों में कश्मीर से आए थे युवक

 

जानकारी के अनुसार, दोनों युवक छुट्टियों में कश्मीर से अपने पिता के पास आए थे जो पोंटा साहिब में किराए पर रहते हैं और फेरी लगाने का काम करते हैं। युवक अपने पिता के काम में सहायता कर रहे थे।

 

घटना सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं।

 

उमर अब्दुल्ला की कड़ी प्रतिक्रिया

 

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में कश्मीरियों के साथ हो रही ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बातचीत कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आग्रह किया।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से मामले में एफआईआर और कड़ी कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ उत्तराखंड में रह रहे जम्मू-कश्मीर के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया गया है।

 

JKSA ने सख्त कार्रवाई की मांग की

 

जम्मू एंड कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन (JKSA) ने घटना को गंभीर बताते हुए आरोप लगाया कि युवकों से पहले उनकी पहचान को लेकर पूछताछ की गई और बाद में हमला किया गया। संगठन ने सख्त धाराओं में एफआईआर दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

घटना के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है।

 

कांग्रेस ने इसे बिगड़ती कानून व्यवस्था का उदाहरण बताते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।

 

वहीं बीजेपी ने कहा कि पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई की है और किसी भी प्रकार की हिंसा या नफरत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

कश्मीरी युवकों के साथ मारपीट के मामले पर सियासत

 

विपक्षी दल कांग्रेस इसे बिगड़ती कानून व्यवस्था बता रही. कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गारिमा ने बताया कि इस तरह के सांप्रदायिक मामले प्रदेश में लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जो की चिंतनीय और शर्मनाक है।

 

कानून व्यवस्था चरमारा चुकी है और सरकार केवल ऐसे मामलों कठोर कार्रवाई ना करते हुऐ केवल लीपापोती करने का काम करती है।

 

बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों पर किया पलटवार

 

वहीं BJP विधायक विनोद चमोली ने इस मामले में अपनी बात कहते हुए कहा इस तरह के सांप्रदायिक हिंसा के मुद्दों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. साथ ही इस मामले पर पुलिस द्वारा विधिवत कार्रवाई की जा चुकी है।

 

इम मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने X पर लिखा

 

यह विरोधाभास चौंकाने वाला है। यही कश्मीरी शॉल पीएम और उनके करीबी लोगों के कंधों पर सार्वजनिक मंचों पर संस्कृति और विरासत के प्रतीक बनकर दिखाई देती हैं।

कश्मीरी कारीगरी की प्रशंसा होती है, कश्मीरी सौंदर्य को अपनाया जाता है। लेकिन उस कारीगरी के पीछे खड़े लोग, बुनकर और विक्रेता- गरिमा, सुरक्षा और सम्मान से वंचित रह जाते हैं। यह कैसा संदेश देता है? कश्मीरी सुंदरता की कीमत है। कश्मीरी श्रम उपयोगी है। लेकिन कश्मीरी जिंदगियां महत्वहीन समझी जाती हैं। और फिर हमसे कहा जाता है कि “कश्मीर अब सामान्य है”, जबकि हकीकत यह है कि भारत में कहीं भी कश्मीरी होना ही असामान्य बना दिया गया है।

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