Friday, September 4, 2026

विकास के नाम पर अव्यवस्था और जनता की पीड़ा अब और बर्दाश्त नहीं: यशपाल आर्य

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भोंपूराम खबरी। यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि शहरों में पेयजल, सीवरेज और शहरी आधारभूत ढांचे के विकास के नाम पर उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट एजेंसी (UUSDA) द्वारा चलाए जा रहे कार्यों ने आज आम जनता का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी सच्चाई यह है कि अधिकांश शहरों में सड़कों को खोदकर अधूरा छोड़ दिया गया है। परिणामस्वरूप हर गली और मोहल्ला धूल, कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो चुका है।

उन्होंने कहा कि स्थिति अत्यंत चिंताजनक और अस्वीकार्य है-

न कार्यस्थलों पर सूचना बोर्ड लगाए गए हैं,

न परियोजनाओं की समय-सीमा स्पष्ट है,

न ठेकेदार कंपनियों की जानकारी सार्वजनिक की गई है।

श्री आर्य ने कहा कि लापरवाही और भ्रष्टाचार की आशंका चरम पर है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह साफ प्रतीत होता है कि बिना ठोस योजना, प्रभावी मॉनिटरिंग और समयबद्ध क्रियान्वयन के इन परियोजनाओं को केवल कागजों में “विकास” दिखाने के लिए चलाया जा रहा है, जबकि जनता रोजाना दुर्घटनाओं, जाम और परेशानियों का सामना कर रही है।

आर्य ने कहा कि नगर निकाय, कार्य कर रही ठेकेदार कंपनियाँ, स्थानीय प्रशासन एवं तकनीकी पर्यवेक्षण अधिकारी, शहरी विकास विभाग और संबंधित मंत्री-सभी को इस अव्यवस्था पर जवाब देना होगा। जनता के टैक्स के पैसे से संचालित इन परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमारी स्पष्ट माँगें निम्नलिखित हैं-

सभी परियोजनाओं के कार्यादेश (Work order), कुल लागत एवं निर्धारित समय-सीमा तत्काल सार्वजनिक की जाए।

प्रत्येक कार्यस्थल पर परियोजना विवरण सहित सूचना बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाया जाए।

स्वतंत्र तीसरी पार्टी से गुणवत्ता की जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

कार्य में देरी पर संबंधित ठेकेदारों पर पेनल्टी एवं ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जाए।

लापरवाही एवं संभावित भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर अव्यवस्था और जनता की पीड़ा अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शहरों को गड्ढों में धकेलकर शासन अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।

श्री आर्य ने कहा कि जनता सीधे सवाल पूछ रही है-

कार्य कब पूर्ण होंगे?

जिम्मेदार कौन है?

और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई कब होगी?

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि शीघ्र समाधान, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो जनहित में लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन प्रारंभ किया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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