Friday, September 4, 2026

नवरात्रि के 5वें दिन स्कंदमाता की पूजा से बच्चों में बढ़ती है एकाग्रता! जानें विधि, मंत्र, भोग

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भोंपूराम खबरी। नवरात्रि के 5वें दिन 23 मार्च 2026 को मां स्कंदमाता की पूजा होगी. ये माता दुर्गा की पांचवीं शक्ति हैं. स्कंदमाता” का अर्थ है- भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता.इनकी गोद में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं, इसलिए इन्हें मातृत्व और करुणा का प्रतीक माना जाता है.

स्कंदमाता का स्वरूप

स्कंदमाता मां दुर्गा का अत्यंत करुणामयी और कल्याणकारी रूप हैं.

चार भुजाएं होती हैं

दो हाथों में कमल पुष्प

एक हाथ में बाल स्कंद (कार्तिकेय)

एक हाथ वरमुद्रा में

वाहन – सिंह

कमल के आसन पर विराजमान (इसी कारण “पद्मासना” भी कहा जाता है)

स्कंदमाता की पूजा करने के लाभ

यह स्वरूप ममता, दया और शक्ति का संगम है. मान्यता है कि जो लोग संतान प्राप्ति में बाधाएं झेल रहे, माता की कृपा से उनके घर जल्द ही किलकारियां गूंजती हैं. जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं.

भक्त को भय, कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा मिलती है.

स्कंदमाता भक्तों को एकाग्र रहना सिखाती हैं. वह बताती हैं कि जीवन अच्छे-बुरे के बीच एक देवासुर संग्राम है और हम खुद अपने सेनापति हैं.

स्कंदमाता की पूजा करते रहने से हमें सैन्य संचालन की शक्ति मिलती रहती है. उनकी पूजा-आराधना से साधक को परम शांति और सुख का अनुभव होता है.

मां स्कंदमाता की पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सिल्वर रंग के वस्त्र धारण करें, क्योंकि इस दिन सोमवार है.

माता को कुमकुम, रोली, और अक्षत (चावल) का तिलक लगाएं.

पूजा के दौरान “ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें.

कपूर या घी के दीपक से मां स्कंदमाता की आरती उतारें और स्तुति करें, जैसे: “या देवी सर्वभूतेषु मा स्कंद माता रूपेण संस्थिता”.

आरती उतारें और गोधुलि बेला में पुन माता की पूजा करें.

मां स्कंदमाता का भोग

मां स्कंदमाता की आराधना होती है. इस दिन केला या केले से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है.

मां स्कंदमाता मंत्र

पूजा मंत्र – ॐ देवी स्कंदमातायै नम:

ध्यान मंत्र –

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।

स्कंदमाता की आरती

जय तेरी हो स्कंदमाता,

पांचवां नाम तुम्हारा आता।

सब के मन की जानन हारी,

जग जननी सब की महतारी। जय तेरी हो स्कंदमाता

तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं,

हर दम तुम्हें ध्याता रहूं मैं।

कई नामों से तुझे पुकारा,

मुझे एक है तेरा सहारा। जय तेरी हो स्कंदमाता

कहीं पहाड़ों पर है डेरा,

कई शहरो में तेरा बसेरा।

हर मंदिर में तेरे नजारे,

गुण गाए तेरे भक्त प्यारे। जय तेरी हो स्कंदमाता

भक्ति अपनी मुझे दिला दो,

शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।

इंद्र आदि देवता मिल सारे,

करे पुकार तुम्हारे द्वारे। जय तेरी हो स्कंदमाता

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए,

तुम ही खंडा हाथ उठाएं।

दास को सदा बचाने आईं,

चमन की आस पुराने आई। जय तेरी हो स्कंदमाता

स्कंदमाता देती हैं ये सीख

स्कंदमाता का यह रूप बताता है कि मोह माया में रहते हुए भी किस तरह बुद्धि और विवेक से असुरों का नाश करना चाहिए. माता को अपने पुत्र से अधिक प्रेम है इसलिए इन्हें अपने पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना अच्छा लगता है.

 

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