Friday, September 4, 2026

मां महागौरी की पूजा विधि, भोग, कन्या पूजन संपूर्ण जानकारी देखें

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भोंपूराम खबरी। चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी 26 मार्च 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन अष्टमी तिथि सुबह 11.48 तक है. नवरात्रि का आठवां दिन मां महागौरी को समर्पित है.

महागौरी अर्थात अत्यंत गौर वर्ण वाली देवी, पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव को पाने की चाहत में कठोर तपस्या के कारण देवी का शरीर काला पड़ गया था, जिसे बाद में भगवान शिव ने गंगाजल से स्नान कराकर पुनः अत्यंत गौर और दिव्य बनाया. इसी कारण इन्हें महागौरी कहा गया. महाष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा विधि, भोग, मंत्र और कन्या पूजन कैसे करें सब जानें.

मां महागौरी की पूजा का मुहूर्त – सुबह 6.50 – सुबह 8.21 कन्या पूजन मुहूर्त – सुबह 10.55 – दोपहर 12.27

मां महागौरी का स्वरूप

वर्ण – सफेद (गौर)

श्वेत वस्त्र धारण करती हैं.

वृषभ (बैल) पर सवार रहती हैं, इसलिए “वृषारूढ़ा” कहलाती हैं.

चार भुजाएं होती हैं – एक हाथ में त्रिशूल, एक हाथ में डमरू अन्य दो हाथों में वरमुद्रा और अभयमुद्रा

मां महागौरी की पूजा विधि

नवरात्रि के आठवें दिन माता महागौरी को नारियल का भोग लगाना चाहिए.

रात की रानी के फूल माता महागौरी को अधिक पसंद है. इसलिए इस दिन फूल से पूजा करनी चाहिए.

माता को चौकी पर स्थापित करने से पहले गंगाजल से स्थान को पवित्र करें. चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका यानी 16 देवियां, सप्त घृत मातृका यानी सात सिंदूर की बिंदी लगाकर स्थापना करें. माता की सप्तशती मंत्रों से पूजा करें.

मां महागौरी का भोग

मां महागौरी को नारियल का भोग बेहद प्रिय है. माता को सफेद रंग की वस्तुएं विशेष पसंद हैं, जो शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक हैं.

मां महागौरी के मंत्र

बीज मंत्र – “ॐ देवी महागौर्यै नमः॥”

ध्यान मंत्र – श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥”

स्तुति मंत्र – “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते॥”

मां महागौरी की पूजा के लाभ

अविवाहित कन्याओं के लिए इनकी पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है, क्योंकि इससे उन्हें योग्य वर की प्राप्ति होती है.

वहीं विवाहित महिलाओं के लिए यह पूजा अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देती है.

मानसिक, आध्यात्मिक और भौतिक तीनों प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं, इसलिए नवरात्रि में उनका विशेष महत्व माना गया है.

देवी भागवत पुराण के अनुसार, उनकी कृपा से साधक के भीतर के नकारात्मक विचार समाप्त होते हैं और वह धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर होता है.

व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है.

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