Friday, September 4, 2026

उत्तराखंड कृषि रोडमैप से पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों के कृषि विकास को मिलेगी नई दिशाः कुलपति

Share

Advertisement

भोंपूराम खबरी,पंतनगर।  उत्तराखंड में खेती, बागवानी, पशुपालन और इससे जुड़े क्षेत्रों के अगले 20 वर्षों के विकास की दिशा तय करने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक ‘उत्तराखंड कृषि रोडमैप’ तैयार करने की तैयारी शुरू कर दी है। रोडमैप का प्रारंभिक मसौदा अगले तीन माह में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें प्रदेश के सभी 13 जिलों की भौगोलिक, जलवायु और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप अलग-अलग प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।

इस महत्वाकांक्षी पहल का नेतृत्व डा. एस.एन. पाण्डेय, सचिव कृषि उत्तराखण्ड शासन द्वारा किया जा रहा है, जबकि गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगकी विश्वविद्याल, पंतनगर के कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप को उत्तराखण्ड कृषि रोडमैप के समन्वयक के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। आज विश्वविद्यालय के कुलपति सभाकक्ष-2 में आयोजित प्रेस वार्ता में कुलपति डा. कश्यप ने बताया कि राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य उत्तराखंड की कृषि एवं संबद्ध अर्थव्यवस्था को आगामी 20 वर्षों के लिए व्यावहारिक, क्रियान्वयन योग्य और मापन योग्य लक्ष्यों के साथ नई दिशा देना है। इसके लिए कृषि, बागवानी, पशुपालन, वानिकी, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, पलायन और रोजगार सृजन सहित 21 विषयगत क्षेत्रों पर विशेषज्ञ समितियां काम करेंगी। उन्होंने बताया कि रोडमैप तैयार करने के प्रारंभिक कार्यक्रम में करीब 170 विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि ऑनलाइन माध्यम से देश-दुनिया से जुड़े और उत्तराखंड के कृषि विकास की भावी दिशा पर विचार-विमर्श किया। सभी समितियों और विशेषज्ञों के सुझावों को एक मंच पर लाने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया गया है। इसी पर सभी टीमें अपना कार्य और सुझाव साझा करेंगी, जिससे एक-दूसरे के काम को देखते हुए समन्वित रूप से तीन माह के भीतर कृषि रोडमैप का मसौदा तैयार किया जा सके।

कुलपति ने बताया कि रोडमैप की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका जनपदवार और क्षेत्र आधारित दृष्टिकोण होगा। पर्वतीय क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार अलग रणनीति तैयार की जाएगी। वहीं तराई-मैदानी क्षेत्रों में खाद्यान्न उत्पादकता, कृषि प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को प्राथमिकता दी जाएगी। देहरादून और नैनीताल जैसे मिश्रित भौगोलिक स्वरूप वाले जिलों के लिए भी क्षेत्रवार कार्ययोजना तैयार होगी। रोडमैप में प्रत्येक जिले की वर्तमान आधारभूत स्थिति का आकलन करते हुए वर्ष 2031, 2036, 2041 और 2046 तक के मापन योग्य लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। उच्च हिमालयी जिलों में शीतोष्ण बागवानी, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, जैव विविधता संरक्षण और कृषि पर्यटन पर विशेष जोर रहेगा। पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन की समस्या के समाधान, बंजर एवं परती भूमि को दोबारा उपयोग में लाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने को भी रोडमैप में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। डा. कश्यप ने बताया कि रोडमैप के निर्माण में न्यूजीलैंड, आयरलैंड और चीन जैसे देशों के सफल कृषि विकास मॉडल से भी सीख ली जा रही है। हालांकि उत्तराखंड के लिए तैयार होने वाला मॉडल प्रदेश की अपनी भौगोलिक, जलवायु और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर आधारित होगा। इसमें किसानों, जनप्रतिनिधियों, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सुझावों को भी शामिल किया जाएगा। इस अवसर पर निदेशक संचार डा. जे.पी. जायसवाल, सहायक निदेशक संचार डा. अर्पिता शर्मा काण्डपाल एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।

Advertisement
Advertisement

Read more

Local News

❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.