Friday, September 4, 2026

आज नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर करें देवी महागौरी की पूजा, कन्या पूजन का मुहूर्त

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भोंपूराम खबरी। द्रिक पंचांग के अनुसार, आज 30 सितंबर 2025 को शाम 6 बजकर 6 मिनट तक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि रहगी, जिसके बाद अगले दिन तक नवमी तिथि रहने वाली है. ऐसे में आज ही शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप देवी मां महागौरी की पूजा की जाएगी. साथ ही कन्या पूजन करना शुभ रहता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन करने से साधकों को मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही व्रत का पूर्ण फल मिलता है. आइए अब जानते हैं 30 सितंबर 2025 के पंचांग के बारे में.

दिशा शूल, नक्षत्र, योग और करण

आज दिनभर उत्तर दिशा शूल और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र रहेगा. इसके अलावा सुबह 1 बजकर 2 मिनट तक शोभन योग था, जिसके बाद अब अतिगण्ड योग चल रहा है. अतिगण्ड योग आज देर रात तक रहेगा. करण की बात करें तो अष्टमी तिथि तक बव रहेगा, जिसके बाद देर रात तक बालव करण रहने वाला है.

मां महागौरी की पूजा का मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: 04:38 ए एम से 05:26 ए एम

अभिजित मुहूर्त: 11:48 ए एम से 12:35 पी एम

विजय मुहूर्त: 02:11 पी एम से 02:58 पी एम

ऐसा है मां महागौरी का स्वरूप

देवी महागौरी का स्वरूप अत्यंत श्वेत, निर्मल और शांत है. शास्त्रों में माता का वर्णन इस प्रकार मिलता है कि इनका शरीर हिम के समान उज्ज्वल और गौर है. माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, स्वर्णाभूषणों से अलंकृत रहती हैं. मां महागौरी का वाहन वृषभ (बैल) है और इनकी चार भुजाएं भी हैं. मां के एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में डमरू, तीसरे से अभय मुद्रा (भय मिटाने का वर) और चौथे से वरमुद्रा (मनोकामना पूर्ण करने का आशीर्वाद) देती हैं. माता का मुखमंडल पूर्ण चंद्रमा के समान उज्ज्वल और शांत है.

महागौरी को प्रिय भोग

नवरात्रि की दुर्गाष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा होती है और माता को सफेद रंग की चीजें अत्यंत प्रिय हैं. इसलिए आज आप माता को दूध से बनी मिठाई (खीर, रसगुल्ला, मिश्री), नारियल, सफेद फूल भक्तजन यह भोग अर्पित कर देवी की कृपा प्राप्त करते हैं.

महागौरी पूजा मंत्र

बीज मंत्र:

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ महागौर्यै नमः

ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

ध्यान मंत्र:

श्वेत वृष पर आरूढ़ा श्वेतांबरधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

स्तोत्र मंत्र (दुर्गा सप्तशती से)

या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान मंत्र

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वरदाभयदात्रीं च महागौरीं नमोऽस्तु ते॥

महागौरी पूजा विधि

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें. एक लकड़ी के आसन पर सफेद कपड़ा बिछाकर महागौरी जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और चारों तरफ गंगाजल से छिड़काव करें. इसके बाद दीपक और धूप जलाएं और देवी को अक्षत (चावल), पुष्प, गंध, रोली और चंदन अर्पित करें. अब माता को सफेद फूल, सफेद वस्त्र और सुगंधित भोग विशेष रूप से अर्पित करें. पूजा के बीच-बीच में परिवार के सदस्यों के साथ माता के जयकारे भी लगाते रहें. देवी के सामने बैठकर उनका ध्यान करें और मंत्र जप करें, ॐ देवी महागौर्यै नमः॥ और वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वरदाभयदात्रीं च महागौरीं नमोऽस्तु ते॥. दुर्गा सप्तशती, सप्तश्लोकी दुर्गा या देवी स्तुति का पाठ करें. माता को भोग में खीर, नारियल, मिश्री, दूध से बने पदार्थ (जैसे रसगुल्ला, पेड़ा) अर्पित करें. अंत में आरती करें जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी. अब परिवार और कन्याओं को भोग प्रसाद वितरित करें.

मां महागौरी की आरती

जय महागौरी जगत की माया.

जय उमा भवानी जय महामाया॥

हरिद्वार कनखल के पासा.

महागौरी तेरा वहा निवास॥

चन्द्रकली और ममता अम्बे.

जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे॥

भीमा देवी विमला माता.

कौशिक देवी जग विख्यता॥

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा.

महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥

सती हवन कुंड में था जलाया.

उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया.

तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥

तभी मां ने महागौरी नाम पाया.

शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥

शनिवार को तेरी पूजा जो करता.

मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो.

महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो॥

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