Friday, September 4, 2026

तीलू रौतेली पुरस्कार: नारी शक्ति का उत्सव और समाज निर्माण का संकल्प’

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भोंपूराम खबरी। उत्तराखंड की धरती हमेशा से वीरांगनाओं और जननायकों की कर्मभूमि रही है। इस देवभूमि की हर घाटी और हर गांव में साहस, संघर्ष और त्याग की कहानियां पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही हैं। इन्हीं प्रेरक कथाओं में सबसे चमकदार नाम है तीलू रौतेली का—वह किशोरी जिसने महज 15 वर्ष की उम्र में शौर्य और पराक्रम से मुग़ल आक्रांताओं का सामना किया और अपनी वीरता की मिसाल कायम की। आज जब राज्य सरकार हर वर्ष तीलू रौतेली पुरस्कार देती है तो यह केवल सम्मान का कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि उस परंपरा की पुनर्पुष्टि होती है जिसमें नारी शक्ति को समाज-निर्माण की धुरी माना गया है।

इस वर्ष प्रदेश की 13 महिलाओं को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है। यही नहीं, 33 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को भी राज्य स्तरीय सम्मान दिया जाएगा। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने स्वयं इसकी घोषणा की और यह भी स्वीकार किया कि वास्तविक सशक्तिकरण का कार्य तो हमारी आंगनबाड़ी बहनें कर रही हैं। ग्रामीण परिवेश में रहकर वे मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और जागरूकता के मोर्चे पर जो काम करती हैं, वह किसी भी बड़े आंदोलन से कम नहीं।

 

दरअसल, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां आज के दौर की मूक नायिकाएं हैं। वे न तो सुर्खियों में रहती हैं और न ही मीडिया की चमक-दमक में दिखाई देती हैं। लेकिन गांव-गांव में उनका काम जीवनरेखा की तरह है—कुपोषित बच्चों को पोषण देना, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण अभियान में सहयोग और सामाजिक जागरूकता। ऐसे कार्यों को मान्यता देना और उन्हें सार्वजनिक मंच से सम्मानित करना समाज के लिए एक बड़ा संदेश है कि नारी शक्ति का मूल्य केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कार्यों से भी स्थापित किया जा सकता है।

यह भी सच है कि बदलते समय में जलवायु परिवर्तन, आपदाओं और पलायन जैसी चुनौतियां उत्तराखंड के सामने खड़ी हैं। ऐसे में महिलाओं की सक्रिय भूमिका और भी अहम हो जाती है। जब महिला शिक्षित और सशक्त होगी, तभी वह परिवार और समाज को इन संकटों से जूझने की ताकत दे पाएगी। सरकार की ओर से दिया जाने वाला यह पुरस्कार न सिर्फ प्रोत्साहन है, बल्कि यह संदेश भी है कि महिलाओं को आगे बढ़ाने में राज्य पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मंत्री रेखा आर्या ने यह कहकर सही ही रेखांकित किया कि इन आंगनबाड़ी बहनों को श्रेय मिलना चाहिए। वास्तव में, महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं और बजट तक सीमित नहीं रह सकता। इसके लिए समाज में मानसिकता का बदलाव जरूरी है। जब किसी गांव की महिला को सम्मान मिलता है तो उस गांव की छोटी बच्चियों में भी यह विश्वास जागता है कि वे भी पढ़-लिखकर और आगे बढ़कर कुछ कर सकती हैं।

यह पुरस्कार समारोह केवल कुछ चुनिंदा महिलाओं का सम्मान नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की नारी शक्ति का उत्सव है। यह हमें याद दिलाता है कि नारी सिर्फ घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं, बल्कि वह समाज निर्माण की दिशा तय करने में भी सक्षम है।

आज जरूरत इस बात की है कि समाज भी इन प्रयासों को आगे बढ़ाए। परिवार और समुदाय महिलाओं को अवसर दें, उन्हें प्रोत्साहित करें और हर स्तर पर उनका साथ निभाएं। जब महिला सशक्त होगी तो परिवार समृद्ध होगा, और जब परिवार समृद्ध होगा तो राज्य और राष्ट्र अपने आप मजबूत होगा।

इस वर्ष तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित होने वाली महिलाएं और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी। उनकी कहानियां न केवल सम्मानित होंगी, बल्कि आने वाले समय में समाज को दिशा भी देंगी।

 

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