Friday, October 16, 2026

नवरात्रि का सातवां दिन : जानें मां कालरात्रि की पूजा विधि, भोग, मंत्र, आरती, कथा और शुभ रंग

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शारदीय नवरात्रि  सातवां दिन , घरों में एक अलग तरह की ऊर्जा महसूस होने लगती है. सुबह की आरती, धूप की खुशबू और मन में श्रद्धा सब कुछ एक साथ मिलकर एक खास माहौल बना देते हैं. इस दिन मां दुर्गा के उग्र लेकिन कल्याणकारी स्वरूप, मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. उनका रूप भले ही डरावना हो, लेकिन भक्तों के लिए वह सुरक्षा कवच की तरह हैं. कहा जाता है कि मां कालरात्रि अंधकार, भय और नकारात्मक शक्तियों को खत्म कर जीवन में नई रोशनी लाती हैं. यही वजह है कि इस दिन की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है और लोग पूरे विधि-विधान से मां को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं.

मां कालरात्रि का स्वरूप और महत्व

मां कालरात्रि का रूप अन्य देवियों से बिल्कुल अलग है. उनका वर्ण श्याम है, खुले बाल, गले में बिजली की तरह चमकती माला और तीन नेत्र ये सब मिलकर उन्हें अत्यंत शक्तिशाली बनाते हैं. पहली नजर में उनका रूप भय उत्पन्न कर सकता है, लेकिन सच्चाई यह है कि मां अपने भक्तों को हर संकट से बचाती हैं.

धार्मिक मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से मां कालरात्रि की पूजा करता है, उसके जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है. कई लोग बताते हैं कि कठिन समय में मां का स्मरण करने से उन्हें मानसिक शांति और साहस मिला. यही कारण है कि मां को “शुभंकारी” भी कहा जाता है.

पूजा विधि

-नवरात्रि के सातवें दिन सुबह जल्दी उठना शुभ माना जाता है.

-स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा का संकल्प लें.

-पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और मां कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.

-इसके बाद रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें.

-ध्यान रखें कि पूजा में सादगी और श्रद्धा सबसे जरूरी है. दिखावे से ज्यादा भाव मायने रखता है.

भोग और आरती का महत्व

मां कालरात्रि को गुड़ और चने का भोग बेहद प्रिय माना जाता है. पूजा के दौरान यह भोग अर्पित करें और फिर परिवार के साथ प्रसाद बांटें. अंत में मां की आरती जरूर करें यही पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

मंत्र और शुभ रंग का महत्व

इस दिन मां के बीज मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः” का जाप विशेष फलदायी माना जाता है. नियमित जाप से मन स्थिर होता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं.

जहां तक शुभ रंग की बात है, इस दिन नीला रंग धारण करना शुभ माना गया है. यह रंग आत्मविश्वास और शांति का प्रतीक है. कई लोग इस दिन नीले कपड़े पहनकर पूजा करते हैं, जिससे उन्हें सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है.

मां कालरात्रि की कथा: बुराई पर अच्छाई की जीत

पौराणिक कथा के अनुसार, जब दैत्य शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया था, तब मां दुर्गा ने कालरात्रि का रूप धारण किया. रक्तबीज को यह वरदान था कि उसकी हर बूंद से नया राक्षस पैदा हो जाता है. ऐसे में मां कालरात्रि ने अद्भुत रणनीति अपनाई. उन्होंने रक्तबीज का वध करते हुए उसके रक्त को जमीन पर गिरने से पहले ही अपने मुख में समेट लिया. इस तरह बुराई का अंत हुआ और देवताओं को राहत मिली. यह कथा हमें सिखाती है कि चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, साहस और बुद्धिमत्ता से हर समस्या का समाधान संभव है.

मां कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय जय महाकाली. काल के मुंह से बचाने वाली॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा. महाचंडी तेरा अवतारा॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा. महाकाली है तेरा पसारा॥

खड्ग खप्पर रखने वाली. दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा. सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी. गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा. कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥

ना कोई चिंता रहे ना बीमारी. ना कोई गम ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट ना आवे. महाकाली मां जिसे बचावे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह. कालरात्रि मां तेरी जय॥

 

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