भोंपूराम खबरी,वॉशिंगटन। भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी जैसे देश जो रूस से कच्चा तेल खरीदते हैं उनपर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले बिल को अमेरिका में जबरदस्त समर्थन मिला है। इस बिल का अमेरिका के 60 सीनेटर्स ने समर्थन किया है जिसके बाद इसके पारित होने की उम्मीद काफी बढ़ गई है। खुद डोनाल्ड ट्रंप भी इस बिल का समर्थन कर चुके हैं। इस बिल को सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार किया था जिनका इसी हफ्ते यूक्रेन से लौटने के बाद अचानक निधन हो गया है।
इस बिल का मकसद रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाना है ताकि ये देश रूसी तेल नहीं खरीदें और रूस को आर्थिक नुकसान हो। लिंडसे ग्राहम के अचानक निधन के बाद मंगलवार को अमेरिकी सीनेटर्स के एक द्विदलीय समूह ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल का संशोधित वर्शन पेश किया। इसमें रूसी एनर्जी के बड़े खरीदारों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इन खरीदारों में भारत भी शामिल है जो रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है।
विधेयक का मुख्य मकसद और प्रस्ताव क्या है?
सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पिछले साल इस बिल को तैयार किया था जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था।
अब 500% टैरिफ को संशोधित कर 100 प्रतिशत टैरिफ कर दिया गया है।
भारत, चीन, अजरबैजान, स्लोवाकिया और हंगरी सबसे ज्यादा रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देश हैं। बिल में साफ तौर पर भारत का नाम लिखा है।
विधेयक में अमेरिका-यूरोपीय देशों को छूट
इस बिल में यूरोप के लिए एक खंड रखा गया है जो प्राकृतिक गैस के उन 15 यूरोपीय खरीदारों को छूट देता है जो रूस से अपनी कुल गैस का 15% से कम आयात करते हैं और इस पर निर्भरता कम करने के लिए कदम उठा रहे हैं।
यानि रूस से गैस खरीदने वाले देशों पर किसी भी तरह का कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। इसीलिए इसे अमेरिका का बहुत बड़ा पाखंड कहा जा रहा है।
अमेरिका अपने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर रूस से ‘यूरेनियम’ का आयात करता है। इसे भी इस बिल में शामिल नहीं किया गया है।
इस कदम की वजह से भारी राजनयिक विरोध हुआ है खासकर नई दिल्ली की तरफ से। नई दिल्ली ने वॉशिंगटन पर ‘दोहरा मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाया है क्योंकि उसने उन कई यूरोपीय देशों को छूट दी है जो अभी भी रूस से ऊर्जा का आयात कर रहे हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल जो इस बिल के सह-प्रायोजक है उन्होंने कहा है ‘इसमें खास तौर पर निशाना साधकर टैरिफ लगाए गए हैं जो सिर्फ पांच बड़े खरीदारों तक सीमित हैं और ये 100 प्रतिशत तक हो सकते हैं।’ उन्होंने आगे कहा ‘इसमें हमारे यूरोपीय सहयोगियों को निशाना नहीं बनाया गया है।’




