Saturday, September 5, 2026

राइस मिल ने डकारा 98 लाख का सरकारी चावल

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भोंपूराम खबरी। जनपद में धान की कुटाई के नाम पर सरकारी चावल खुर्द-बुर्द करने का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। बिन्दुखेड़ा रोड स्थित स्वास्तिक राइस लैंड प्राइवेट लिमिटेड ने उत्तराखंड प्रादेशिक को-ऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड (पीसीयू) का करीब 2811 क्विंटल चावल डकार लिया।

कुल 98-47 लाख रुपये की राजस्व हानि के इस मामले में पुलिस ने पीसीयू प्रबंधक की शिकायत पर मिल के दो निदेशकों और लेखाकार के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। उत्तराखंड प्रादेशिक को-ऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड (पीसीयू) के क्षेत्रीय प्रबंधक धीरज कुमार ने कोतवाली पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि खरीफ सत्र 2023-24 के तहत मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत ग्राम दानपुर, बिन्दुखेड़ा रोड स्थित स्वास्तिक राइस लैंड प्राइवेट लिमिटेड को कुटाई के लिए 4462 क्विंटल धान आवंटित किया गया था।

शासन की नीति के अनुसार, मिल को 67 प्रतिशत रिकवरी के साथ 2989-54 क्विंटल चावल राजकीय गोदामों में जमा करना था। भारत सरकार द्वारा निर्धारित अंतिम तिथि 15 सितंबर 2024 बीत जाने के बावजूद मिल ने मात्र 178-20 क्विंटल चावल ही जमा किया, जबकि 2811-34 क्विंटल चावल का कोई अता-पता नहीं चला। मामले में संदेह होने पर जब जिला अधिकारी के निर्देश पर 18 अक्टूबर 2024 को नायब तहसीलदार रुद्रपुर सुरेश चंद्र बुढलाकोटी के नेतृत्व में टीम ने मिल का भौतिक सत्यापन किया, तो वहां स्थिति चौंकाने वाली थी। मिल परिसर में धान का एक भी दाना मौजूद नहीं था। टीम को वहां केवल 23 कट्टðे टूटा चावल, 320 कट्टðे एफआरके और कुछ खाली बोरे मिले। इससे यह स्पष्ट हो गया कि मिल प्रबंधन ने सरकारी धान को बाजार में बेचकर या अन्य तरीके से खुर्द-बुर्द कर दिया है। तहरीर में बताया गया कि सत्यापन के बाद मिल के निदेशक ने एक शपथ पत्र देकर 6 माह के भीतर भुगतान का समय मांगा था। उन्होंने और उनके पुत्र आशीष ने कई बार आश्वासन दिया कि नई फर्म बनाकर बैंक से ऋण लेकर वे सरकारी बकाया चुका देंगे। हालांकि, बाद में मिल प्रबंधन अपनी बातों से मुकर गया। मिल द्वारा जमानत के तौर पर दिए गए चेकों को लेकर भी उनके अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजा गया कि उन्हें बैंक में प्रस्तुत न किया जाए, जिससे साफ जाहिर होता है कि खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं थी और चेक केवल कार्रवाई टालने के लिए दिए गए थे। पीसीयू द्वारा 10 जुलाई 2025 तक भुगतान का अंतिम अवसर देने के बाद भी जब 98,47,788 रुपये की रिकवरी नहीं हुई, तो विभाग ने कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया। पुलिस ने मिल के निदेशक पुरुषोत्तम दास, निदेशक लक्ष्मी अग्रवाल और लेखाकार राजेंद्र सिंह के विरुद्ध षडड्ढंत्र के तहत सरकारी संपत्ति का गबन करने और धोखाधड़ी का अभियोग पंजीकृत किया है। पुलिस अब मिल के वित्तीय लेन-देन और अन्य संपत्तियों की जांच कर रही है।

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