Friday, September 4, 2026

कैंची धाम में करोड़ों के चढ़ावे का नहीं हिसाब ! हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, राज्य सरकार को नोटिस जारी

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भोंपूराम खबरी। प्रसिद्ध कैची धाम में करोड़ों के चढ़ावे का कोई स्पष्ट लेखा नहीं होने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। बता दें कि पिथौरागढ़ जिले के बासीखेत निवासी ठाकुर सिंह डसीला के एक पत्र हाईकोर्ट को भेजा था। पत्र में कहा गया है कि बाबा नीब करौरी की ओर से स्थापित कैंची धाम का संचालन करने वाले ट्रस्ट के बारे में मूलभूत जानकारी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। मंदिर ट्रस्ट का नाम, पंजीकरण विवरण, कार्यालय का पता, ट्रस्टियों की संख्या और नियुक्ति संबंधी जानकारी प्रशासन और रजिस्ट्रार कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। पत्र में कहा गया है कि कैची धाम में सालाना लाखों श्रद्धालु दर्शन को आते हैं। यहां पर सालाना करोड़ों रुपये का चढ़ावा चढ़ता है। बावजूद इसके प्रबंधन की ओर से चढ़ावे का आय-व्यय का विवरण जारी नहीं किया जाता है।

विदेशी अंशदान का भी लेखा नहीं

हाईकोर्ट को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कैंची धाम में सालाना विदेशी श्रद्धालु भी बढ़ी संख्या में पहुंचते हैं। बावजूद इसके विदेशी अंशदान को भी सार्वजनिक नहीं किया गया है। कहा गया है कि मंदिर के आय-व्यय की निगरानी के लिए प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। धार्मिक ट्रस्टों का पंजीकरण ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के तहत होता है, इसलिए ट्रस्ट डीड, पंजीकरण प्रमाणपत्र, ट्रस्टियों का विवरण, संपत्ति और वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। ग्रामीणों व सम्मानित लोगों को भी ट्रस्ट प्रबंधन में शामिल करने की मांग की है

इन मंदिरों का दिया हलावा

हाईकोर्ट को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में आय-व्यय की सरकारी निगरानी की व्यवस्था है। प्रमुख मंदिरों का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि बदरीनाथ-केदारनाथ धाम का संचालन अधिनियम के तहत किया जाता है। अल्मोड़ा जिले के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम का प्रबंधन जिला प्रशासन की निगरानी में समिति के माध्यम से होता है। देश के अन्य बड़े मंदिरों में भी सरकारी निगरानी या वैधानिक व्यवस्था है।

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