Friday, September 4, 2026

Navratri 2025 Day 2: मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए पढ़ें ये कथा, जानिए मां ब्रह्मचारिणी मंत्र और पूजा विधि

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भोंपूराम खबरी। नवरात्रि के दिन बहुत शुभ माने जाते हैं। नौ दिन और नौ रातों तक मां दुर्गा की पूजा की जाती है। हिंदुओं के लिए शारदीय नवरात्रि का खास महत्व है। लोग इन दिनों को बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं।

इन दिनों भक्त धार्मिक और आध्यात्मिक साधनाएं करते हैं। आज नवरात्रि का दूसरा दिन है, जो देवी ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर 2025 से हो चुकी है। अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 23 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी।

जानिए नवरात्रि के दूसरे दिन का महत्व

हिंदुओं के लिए नवरात्रि का बड़ा महत्व है। दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है, जिन्हें तपस्या की देवी कहा जाता है। माता सफेद वस्त्र धारण करती हैं, दाहिने हाथ में माला और बाएँ हाथ में कमंडल रखती हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करने से शक्ति, ज्ञान और विवेक प्राप्त होता है। उन्हें देवी योगिनी और देवी तपस्विनी भी कहा जाता है। यह मां का बहुत ही शांत और सुंदर रूप है। मां मंगल ग्रह की अधिष्ठात्री हैं और स्वाधिष्ठान चक्र पर नियंत्रण रखती हैं। माना जाता है कि जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है, उन्हें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करनी चाहिए।

पढ़िए मां ब्रह्मचारिणी की कथा

मां ब्रह्मचारिणी को लाल रंग और गुड़हल के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, वे राजा हिमालय और रानी मेना की पुत्री पार्वती के रूप में जन्मी थीं। उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की।

हजार वर्ष तक केवल फल और फूल खाए, फिर हजार वर्षों तक केवल जड़ी-बूटियों पर जीवित रहीं, और फिर हजार वर्षों तक टूटे हुए बेलपत्र पर। इसके बाद उन्होंने अन्न और जल का त्याग कर दिया। उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवताओं और सप्तऋषियों ने उन्हें आशीर्वाद दिया और “अपर्णा” नाम दिया।

 

जानिए मां ब्रह्मचारिणी मंत्र

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

क्या है पूजा विधि?

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।

मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएँ।

मां को श्रृंगार सामग्री, सफेद मोगरा और गुड़हल का फूल, तथा कुंकुम अर्पित करें।

सफेद मिठाई चढ़ाएं।

दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और मां के मंत्रों का जाप करें।

शाम को भी आरती और पूजन करें।

पूजा के बाद व्रत खोलें।

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