Friday, September 4, 2026

PM की पंजाब यात्रा से पहले खालिस्तानी एक्टिव, जसवंत खालड़ा का लिया नाम; क्या प्लान

Share

Advertisement

भोंपूराम खबरी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब का दौरा करने वाले हैं। इससे पहले ही खालिस्तानी सक्रिय नजर आ रहे हैं। खबर है कि हाल ही में एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दिल्ली जा रही ट्रेन पर खालिस्तान समर्थक नारे लिखे हुए हैं। ट्रेन फिरोज कैंट रेलवे स्टेशन पर नजर आ रही है। इस वीडियो को अलगाववादी समूह SFJ यानी सिख्स फॉर जस्टिस की तरफ से पोस्ट किया गया था। लाइव हिन्दुस्तान वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वीडियो को एसएफजे फाउंडर गुरपतवंत सिंह पन्नू ने पोस्ट किया था। इस दौरान उसने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का जिक्र किया था। खास बात है कि सतलुज फिल्म के चलते खालड़ा दोबारा चर्चा में हैं। पन्नू ने वीडियो में पीएम मोदी की यात्रा के दौरान खालिस्तानी झंडे दिखाने के लिए भी कहा है

द स्टेट्समैन की रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में पन्नू ने दावा किया है कि खालड़ा ने 90 के दशक में अज्ञात शवों से जुड़े केस के दस्तावेज तैयार किए थे। साथ ही आरोप लगाए कि ये दस्तावेज मानवाधिकार उल्लंघन के एक पैटर्न को दिखाते हैं।

इधर, अधिकारियों ने फिरोजपुर कैंट रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी जांच शुरू कर दी है। इसके जरिए ट्रेन पर नारे लिखने वालों की पहचान की जानी है। इसके अलावा पुलिस मौका-ए-वारदात से फॉरेंसिक सबूत भी जुटा रही है। इसके अलावा पीएम मोदी के दौरे को लेकर पुलिस अलर्ट मोड पर है और इलाके की सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी गई है।

पीएम मोदी का दौरा

संभावनाएं हैं कि पीएम मोदी 15 और 17 जुलाई के बीच पंजाब का दौरा कर सकते हैं। उस दौरान वह लुधियाना और जालंधर में होने वाले कार्यक्रमों में शिरकत कर सकते हैं। इसमें जालंधर कैंट स्टेशन का उद्घाटन भी शामिल है। वहीं, चंडीगढ़ में भी कई विकास कार्यों का भी उद्घाटन कर सकते हैं।

सतलुज विवाद पर क्या बोले केंद्रीय मंत्री केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने रविवार को कहा कि दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ के निर्माता ‘विवादित दावों को स्थापित इतिहास’ के तौर पर पेश कर ‘रचनात्मक स्वतंत्रता’ की आड़ नहीं ले सकते। बिट्टू ने कहा कि पंजाब का दर्दनाक अतीत कोई ऐसी पटकथा नहीं है जिसे किसी विमर्श के हिसाब से चुनिंदा ढंग से संपादित किया जा सके।

बिट्टू ने कहा, ‘मैं ‘सतलुज’ फिल्म के निर्माता और निर्देशक को चुनौती देता हूं कि वे पंजाब के लोगों के सामने वे सभी दस्तावेजी सबूत, सरकारी रिकॉर्ड, न्यायिक निष्कर्ष और प्रमाणित डेटा रखें, जिनसे 25,000 लोगों के लापता होने या उन्हें गैर-कानूनी तरीके से अंतिम संस्कार किये जाने की बात स्थापित हो जैसा कि फिल्म में दर्शाया गया है। ‘बिट्टू, पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं। बेअंत सिंह की 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में उच्च सुरक्षा वाले सचिवालय में हत्या कर दी गई थी।

उन्होंने पूछा, ‘अगर यह आंकड़ा सिर्फ एक अनुमान या आरोप है, तो इसे एक स्थापित ऐतिहासिक तथ्य के तौर पर क्यों पेश किया गया? दर्शकों को यह क्यों नहीं बताया गया कि यह संख्या किसी अंतिम न्यायिक फैसले से पक्के तौर पर साबित नहीं हुई है?’

फिल्म और विवाद

हनी त्रेहन के निर्देशन में बनी फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है, जिन्होंने 1984 और 1994 के बीच पंजाब में हजारों ‘अज्ञात’ शवों के ‘गैर-कानूनी ढंग से किए गए’ अंतिम संस्कार की जांच की थी। इस फिल्म को तीन जुलाई को रिलीज होने के दो दिन बाद ही भारत में ओटीटी मंच ‘जी 5’ से हटा दिया गया था,

क्योंकि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई थीं।

Advertisement
Advertisement

Read more

Local News

❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.