भोंपूराम खबरी। हल्द्वानी के रामनगर वन प्रभाग के फतेहपुर रेंज अंतर्गत आतंक का पर्याय आदमखोर बाघ को आखिरकार वन विभाग के डॉक्टरों की टीम में ट्रेंकुलाइज किया है। इस सफलता के बाद वन विभाग और क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। फिलहाल वन विभाग का कहना है कि
क्षेत्र में और भी बाघ हो सकते हैं। ऐसे में ग्रामीण अभी भी सावधान रहें। जांच रिपोर्ट के बाद ही पता चल सकेगा कि पड़ा बाघ आदमखोर है या नहीं।
कॉर्बेट टाइगर के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ दुष्यंत शर्मा के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने मोर्चा संभाला था। टीम मंगलवार रात के समय बंद वाहनों में बैठकर बाघ की निगरानी कर रही थी। जैसे ही बाघ पिंजरे के नजदीक आया, टीम ने उसे ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू किया है। वन अधिकारियों ने बाघ के पकड़े जाने की पुष्टि करते हुए ग्रामीणों से अपील की है कि वे अभी भी अकेले जंगल की ओर न जाएं और सतर्कता बरतें।
डीएफओ ध्रुप सिंह मर्तोलिया ने बताया कि बाघ को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू कर ढेला रेंज को भेजा है। पकड़ा गया नर बाघ की उम्र करीब साढ़े तीन साल के आसपास है । बाघ को पनियाली क्षेत्र के जंगल से ट्रेंकुलाइज किया गया है।
जंगल घास लेने गई दो महिलाओं को बना चुका था निवाला
गौरतलब है की 15 दिन के अंदर बाघ ने दो महिलाओं को मौत के घाट उतार दिया था। बाघ ने 12 फरवरी को पीपलपोखरा एक गांव में जंगल में घास काटने वाली गंगा देवी को अपना निवाला बनाया था। इसके ठीक 14 दिन बाद 25 फरवरी को पनियाली की कमला फर्त्याल को जंगल में घास काटने के दौरान बाघ ने अपना निवाला बनाया था। दोनों घटना के बाद से लोगों में दहशत का माहौल था। बाघ को पकड़ने के लिए लोगों ने बड़ा प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद वन विभाग की टीम ने बाघ को पकड़ने के लिए डॉक्टरों की दो टीमों के साथ-साथ पिंजरा भी लगाया था। जहां वन विभाग को मंगलवार दिन रात बाघ को पकड़ने में कामयाबी मिली है।




