Friday, September 4, 2026

हाईकोर्ट पहुंचा कुलसुम खान फार्म विवाद, एसडीएम-एसएचओ तलब। भाजपा ने वाड्रा परिवार पर लगाए गंभीर आरोप

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भोंपूराम खबरी,देहरादून/ऊधम सिंह नगर: उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा स्थित चर्चित कुलसुम खान फार्म भूमि विवाद ने अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर तूल पकड़ लिया है।

एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, उनके पति रॉबर्ट वाड्रा और उनकी जेठानी सायरा वाड्रा पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर यह मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है।

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए किच्छा के एसडीएम और संबंधित कोतवाली के एसएचओ को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

 

भाजपा का आरोप: जमीन हड़पने की कोशिश

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा उत्तराखंड में चार एकड़ भूमि पर कब्जा करने की कोशिश में शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ अपने समर्थकों के साथ कथित रूप से 90 वर्षीय महिला नसरीन खान को जमीन खाली करने के लिए धमकाने पहुंचे।

भंडारी ने कहा कि यह आरोप स्वयं नसरीन खान के बयान पर आधारित हैं। उनके अनुसार, बुजुर्ग महिला ने दावा किया है कि कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता उनकी संपत्ति का कब्जा लेकर उसे वाड्रा परिवार को सौंपना चाहते थे। भाजपा ने आरोप लगाया कि यदि कानूनी प्रक्रिया से जमीन हासिल नहीं हो सकती, तो दबाव और धमकी का सहारा लिया जा रहा है।

 

क्या है कुलसुम खान फार्म विवाद?

यह मामला किच्छा क्षेत्र के पिपलिया मोड़ स्थित कुलसुम खान फार्म से जुड़ा है। संपत्ति को लेकर दो पक्षों के बीच स्वामित्व का विवाद चल रहा है।

याचिका के अनुसार, कुलसुम खान ने वर्ष 2024 में पंजीकृत वसीयत के माध्यम से अपनी संपत्ति सायरा वाड्रा और अपने चचेरे भतीजे सिकंदर आलम खान के नाम कर दी थी। 18 दिसंबर 2025 को कुलसुम खान के निधन के बाद संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया।

दूसरे पक्ष की ओर से नसरीन खान इस संपत्ति पर अपना अधिकार जता रही हैं।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला, प्रशासन से मांगा जवाब

सिकंदर आलम खान की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले को गंभीर माना। याचिका में आरोप लगाया गया कि सिविल कोर्ट द्वारा 11 जून 2026 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिए जाने के बावजूद प्रशासन ने कथित तौर पर दूसरे पक्ष को संपत्ति पर कब्जा दिला दिया।

याचिका में यह भी कहा गया कि फार्म परिसर में मौजूद महिलाओं, बच्चों और पशुओं को कई दिनों तक अंदर ही रहने को मजबूर होना पड़ा तथा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।

एसडीएम और एसएचओ को कोर्ट में तलब

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने किच्छा के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और संबंधित थाना प्रभारी (एसएचओ) को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि सिविल कोर्ट के 11 जून के आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

6 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

अब इस बहुचर्चित भूमि विवाद की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी। अदालत के समक्ष प्रशासन को अपनी कार्रवाई का पूरा विवरण प्रस्तुत करना होगा। वहीं, भाजपा के आरोपों और भूमि विवाद को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है।

 

 

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