Friday, September 4, 2026

खाकी पर अपनों का ही अविश्वास: सरयू में मिला दारोगा का शव, न्याय के लिए धरने पर बैठे एडीएम भाई

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भोंपूराम खबरी। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कानून व्यवस्था और खाकी के इकबाल पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए जब चार दिनों से लापता सब-इंस्पेक्टर अजय कुमार गौड़ का निर्जीव शरीर सरयू नदी की लहरों में उतराता मिला। यह केवल एक पुलिसकर्मी की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह एक भाई के उस विश्वास के टूटने की कहानी है जो खुद शासन का हिस्सा है। झांसी में एडीएम न्यायिक के पद पर तैनात अरुण कुमार गौड़ अपने पीसीएस भाई के साथ आज उस सिस्टम के खिलाफ धरने पर बैठ गए हैं, जिसका वे खुद एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। एडीएम का यह विलाप और आक्रोश सीधे तौर पर बस्ती पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब एक एडीएम स्तर के अधिकारी को अपने भाई की तलाश में सहयोग नहीं मिला, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी।

 

साजिश की बू और अधूरी जांच के बीच उलझते सुलगते सवाल

घटनाक्रम की कड़ियां पांच फरवरी से जुड़ती हैं, जब परशुरामपुर थाने के कार्यवाहक प्रभारी अजय गौड़ सुबह चाय-नाश्ता करके ड्यूटी के लिए निकले थे। दोपहर तक उनकी बातचीत अपनी पत्नी रंजीता से हुई, लेकिन उसके बाद उनका फोन खामोश हो गया। रंजीता का आरोप है कि अजय को पूर्व में दुबौलिया थाने में तैनाती के दौरान एक नाबालिग की मौत के मामले में लगातार धमकियां मिल रही थीं। इस पहलू को नजरअंदाज करना पुलिस की भारी चूक मानी जा रही है। एडीएम अरुण गौड़ ने सीधे तौर पर सीओ हर्रैया पर अभद्रता का आरोप लगाया है और दावा किया है कि उनके भाई को साजिशन फंसाने और ठिकाने लगाने का काम किया गया है। वे इसे आत्महत्या मानने को कतई तैयार नहीं हैं और इसे एक ‘प्लांड मर्डर’ करार दे रहे हैं।

 

न्याय की दहलीज पर अड़ा परिवार और थर्राता पुलिस महकमा

मौके पर मचे कोहराम के बीच एडीएम ने साफ कर दिया है कि वे कप्तान से बात नहीं करेंगे। उनकी मांग है कि जब तक डीआईजी मौके पर नहीं आते और पूरे थाने को निलंबित करने के साथ-साथ चार नामजद लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होता, तब तक वे शव को वहां से हटने नहीं देंगे। मृतक दारोगा के दो मासूम बच्चों और पत्नी की चीखें बस्ती की हवाओं में न्याय की गुहार लगा रही हैं। एक तरफ एसपी यशवीर सिंह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अपनों का खोया हुआ भरोसा पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। यह मामला अब केवल बस्ती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने की चेतावनी ने लखनऊ के गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है।

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