Saturday, September 5, 2026

अगले 72 घंटे भारी : तीन पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, भीषण बारिश-बर्फबारी और तूफानी हवाएं मचाएंगी कहर, एडवाइजरी जारी

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भोंपूराम खबरी। मौसम कल यानी 22 जनवरी की शाम से करवट बदल सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में लगातार तीन पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहे हैं। । मजबूत पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर से आ रही नमी के चलते 22 जनवरी को उत्तराखंड के उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, देहरादून, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले के कुछ स्थानों पर बारिश के आसार नजर आ रहे हैं। साथ ही 28 सौ मीटर ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की भी संभावना है। आईएमडी के मुताबिक 23 जनवरी को राज्य के सभी जिलों में झमाझम बारिश हो सकती है। इसे लेकर आईएमडी ने कल स्पेशल अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून की ओर से मंगलवार को विशेष प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर के मुताबिक 22 जनवरी की रात से मौसम बदलेगा। असर 24 जनवरी की दोपहर तक रहेगा। सबसे ज्यादा असर 23 जनवरी को रहेगा। येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। आईएमडी के मुताबिक 23 से 25 जनवरी तक राज्य के सभी जिलों में बारिश के आसार हैं। साथ ही राज्य में 23 सौ मीटर ऊंचाई वाले इलाकों के में भारी बर्फबारी की भी संभावना है। उत्तराखंड में 22 से 27 जनवरी तक बारिश-बर्फबारी का अलर्ट जारी हुआ है। 23 जनवरी के लिए आईएमडी ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

इन जिलों के लिए अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में 2800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई है। 2300 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले अन्य इलाकों में भी मध्यम बर्फबारी होगी। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में भी कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। 23 और 24 को प्रदेश में ओलावृष्टि के साथ 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का येलो अलर्ट जारी किया है।

सड़कें बंद होने का खतरा

मौसम विभाग ने भारी बर्फबारी की संभावनाओं को देखते हुए प्रशासन और जनता के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। बर्फबारी से सड़कें बंद हो सकती हैं। बर्फबारी वाले इलाकों में बिजली की लाइनें और पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। लोगों को पावर बैकअप और जरूरी दवाइयां रखने की सलाह दी गई है। पहाड़ों की यात्रा कर रहे लोगों और पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों पर रुकें और पेड़ों के नीचे शरण न लें।

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