Saturday, September 5, 2026

पंतनगर विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापकों के साथ कुलपति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित

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भोंपूराम खबरी,पंतनगर।  गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में विश्वविद्यालय केंद्र स्थित समिति कक्ष में कुलपति डा. एस. के. कश्यप द्वारा सभी सहायक प्राध्यापकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विभागों के सहायक प्राध्यापकों ने प्रतिभाग किया। बैठक का उद्देश्य विश्वविद्यालय में शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार तथा प्रसार गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाते हुए कृषि शिक्षा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना था।

बैठक को संबोधित करते हुए कुलपति डा. एस. के. कश्यप ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक केवल अध्यापन तक सीमित न रहें, बल्कि समाज, किसानों और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नवाचार आधारित अनुसंधान कार्यों को आगे बढ़ाएं। उन्होंने शिक्षकों से कृषि, ग्रामीण विकास, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, पोषण सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि तकनीकों तथा उद्यमिता विकास जैसे समसामयिक एवं अभिनव विषयों पर शोध परियोजनाएं तैयार करने का आह्वान किया।

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर अग्रणी संस्थान बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी सहायक प्राध्यापकों को उच्च गुणवत्ता वाली राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में शोध पत्र प्रकाशित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शोध पत्र ऐसे विषयों पर आधारित होने चाहिए जो किसानों की समस्याओं के समाधान, कृषि उत्पादकता वृद्धि तथा ग्रामीण आजीविका सुधार में उपयोगी सिद्ध हों।

उन्होंने कहा कि सहायक प्राध्यापकों को बहु-विषयक अनुसंधान को बढ़ावा देना चाहिए तथा विभिन्न विभागों और संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर सहयोगात्मक शोध कार्य करने चाहिए। उन्होंने “समन्वय मॉडल” को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ जब एक साथ कार्य करेंगे तो शोध के बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

बैठक के दौरान कुलपति ने समय प्रबंधन, कार्य संस्कृति, शैक्षणिक उत्तरदायित्व तथा दीर्घकालिक कार्ययोजना पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने प्रत्येक शिक्षक से अपने आगामी 10 वर्षों की शैक्षणिक एवं अनुसंधान योजना तैयार करने तथा स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक शिक्षक को अपने विभाग में नवीन शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल तकनीकों एवं व्यावहारिक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए ताकि विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।

डा. एस.के. कश्यप ने सहायक प्राध्यापकों को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के शैक्षणिक भ्रमण, शोध सहयोग, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं अनुभव साझा करने वाली गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति शिक्षकों की ऊर्जा, सकारात्मक सोच एवं नवाचार क्षमता पर निर्भर करती है।

बैठक में उपस्थित सहायक प्राध्यापकों ने भी शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय में शोध एवं नवाचार की नई संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

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