भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर। नगर को जाम की समस्या से स्थाई मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। बुधवार को एडीएम पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में प्रशासन की संयुक्त टीम ने त्रिशूलक चौक के समीप हाईवे चौड़ीकरण के लिए मौका मुआयना किया। इस दौरान टीम ने अतिक्रमण को चिन्हित करते हुए लाल निशान लगाए और अतिक्रमणकारियों को जल्द जगह खाली करने के कड़े निर्देश दिए।
बुधवार दोपहर एडीएम पंकज उपाध्याय के साथ जिला विकास प्राधिकरण, नगर निगम, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग और विद्युत विभाग की संयुक्त टीम पुलिस बल के साथ इंदिरा चौक पहुंची। टीम ने विशेष रूप से उस हिस्से का निरीक्षण किया जो लेफ्ट कट को खोलने में बाधक बना हुआ है। पैमाइश के दौरान डिवाइडर से दोनों ओर 100-100 फीट की जगह को मानक मानकर चिन्हीकरण की कार्रवाई की गई। एडी एम पंकज उपाध्याय ने बताया कि शहर के मुख्य मार्गों को यातायात के लिए सुगम बनाने हेतु हाईवे का चौड़ीकरण अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले दो-तीन दिनों के भीतर सभी संबंधित अतिक्रमणकारियों को औपचारिक नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर यदि अतिक्रमण स्वयं नहीं हटाया गया, तो प्रशासन बलपूर्वक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाएगा। एडीएम ने यह भी आश्वासन दिया कि यदि चौड़ीकरण की जद में किसी की फ्ी-होल्ड प्रॉपर्टी या वैध दुकानें आती हैं, तो नियमानुसार उनकी सुनवाई कर मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रशासनिक योजना के अनुसार, केवल त्रिशूलक चौक ही नहीं बल्कि शहर के डीडी चौक को भी जाम मुक्त करने के लिए चौड़ीकरण की डीपीआर तैयार हो चुकी है।
अतिक्रमण हटने के तुरंत बाद इन दोनों चौराहों पर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। निरीक्षण के दौरान मौजूद नगर आयुक्त शिप्रा जोशी पांडे ने बताया कि त्रिशूल चौक के पास नगर निगम की लगभग 23 दुकानों का कुछ हिस्सा भी अतिक्रमण की जद में आ रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्व में नगर पालिका द्वारा आवंटित दुकानों के आगे दुकानदारों ने अवैध रूप से टीन शेड डालकर अतिक्रमण कर लिया है। नगर आयुक्त ने साफ लहजे में कहा कि डिवाइडर से 100 फीट के दायरे में आने वाले हर अवैध निर्माण को सख्ती से हटाया जाएगा। इस अभियान के दौरान प्रशासन की सक्रियता देख दुकानदारों और अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा रहा। टीम में तहसीलदार, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता और नगर निगम के अधिकारी मुख्य रूप से शामिल रहे।




