Friday, September 4, 2026

यहां जंगल में दो नर बाघों के बीच टेरिटरी की छिड़ी जंग , दोनों की हुई मौत

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भोंपूराम खबरी। हल्द्वानी के जंगल में दो नर बाघों के बीच टेरिटरी की ऐसी जंग छिड़ी कि दोनों ने एकदूसरे को मौत के घाट उतार दिया। रविवार सुबह गुमान गांव के पास जंगल में दोनों के शव महज 20 मीटर की दूरी पर मिले। उत्तराखंड में पहली बार सामने आए इस मामले ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया।

ग्रामीणों के मुताबिक रातभर जंगल से बाघों की दहाड़ और भिड़ंत की आवाजें आती रहीं। इस डर से कोई घर से बाहर नहीं निकला कि कहीं घायल बाघ गांव की ओर न आ जाए। सुबह वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो जंगल का मंजर देखकर सभी सन्न रह गए।

वन विभाग की शुरुआती जांच में इसे टेरिटरी को लेकर हुई लड़ाई माना जा रहा है। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच कराई गई है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह की अंतिम पुष्टि होगी।

काठगोदाम से करीब 18 किलोमीटर दूर हैडाखान रोड स्थित गुमान गांव के लोगों ने शनिवार रात जंगल से लगातार बाघों के दहाड़ने और लड़ने की तेज आवाजें सुनीं। ग्राम प्रधान दीपू बिष्ट के अनुसार, संघर्ष इतना भयावह था कि पूरा गांव दहशत में रहा। ग्रामीणों ने रात में ही वन विभाग को सूचना दे दी थी।

ग्रामीणों को आशंका थी कि घायल बाघ गांव की ओर आ सकते हैं। इसी वजह से रविवार सुबह भी कोई ग्रामीण जंगल की तरफ नहीं गया। करीब सुबह 10 बजे वन विभाग की टीम गांव पहुंची और गांव से लगभग एक किलोमीटर अंदर गहरी खाई वाले जंगल में दोनों बाघों के शव बरामद किए।

20 मीटर की दूरी पर पड़े थे दोनों बाघ, चारों ओर फैला था खून

वन विभाग की टीम ने देखा कि दोनों नर बाघ करीब 20 मीटर की दूरी पर मृत पड़े थे। घटनास्थल पर भारी मात्रा में खून, पंजों के निशान और संघर्ष के स्पष्ट सबूत मिले। आसपास घसीटे जाने के निशान भी मिले, जिससे साफ हुआ कि दोनों के बीच लंबे समय तक जानलेवा लड़ाई हुई थी।

अधिकारियों के मुताबिक एक बाघ की उम्र करीब 3 से 4 वर्ष और दूसरे की 4 से 5 वर्ष के बीच थी। दोनों वयस्क नर बाघ थे।

डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि डॉक्टरों के पैनल ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की गाइडलाइन के अनुसार दोनों बाघों का पोस्टमार्टम किया।

जांच में सामने आया कि एक बाघ की जुगुलर वेन (गर्दन की मुख्य नस फट गई थी, जबकि दूसरे की फेमोरल आर्टरी ( जांघ की मुख्य धमनी) पंचर मिली । अत्यधिक रक्तस्राव के कारण दोनों की मौत होने की संभावना जताई गई है।

दोनों बाघों के शरीर पर गहरे घाव मिले हैं। हालांकि उनके पंजे, नाखून, दांत और शरीर के अन्य सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे अवैध शिकार की आशंका लगभग खारिज हो गई है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ कुंदन कुमार स्वयं मौके पर पहुंचे। वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ.

राहुल

सती, डॉ. हिमांशु पांगती, वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट प्रशांत, एसडीओ गणेश जोशी, वन क्षेत्राधिकारी और

,

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम

कराया गया।

पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई। डीएनए और अन्य फॉरेंसिक जांच के लिए आवश्यक नमूने भी एकत्र कर सुरक्षित रखे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की अंतिम पुष्टि की जाएगी।

बारिश में शव जलाने में लग गए 10 घंटे

वन विभाग की टीम रविवार सुबह करीब 10 बजे घटनास्थल पहुंची थी। पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद नियमानुसार दोनों बाघों के शवों का अंतिम निस्तारण किया गया।

बारिश के कारण लकड़ियां गीली थीं, जिससे आग जलाने में कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। दोनों शवों का अंतिम संस्कार करने के बाद टीम रात करीब 8 बजे जंगल से वापस लौटी।

वन अधिकारियों के अनुसार बाघों के बीच टेरिटरी को लेकर संघर्ष होना सामान्य बात है। आमतौर पर एक बाघ की मौत होती है या दूसरा गंभीर रूप से घायल होकर बाद में दम तोड़ देता है। इसलिए ऐसे मामलों में घायल बाघ की तलाश शुरू कर दी जाती है।

लेकिन यह पहला मामला है, जब आपसी संघर्ष के बाद दोनों बाघ एक ही जगह और लगभग एक ही समय पर मृत मिले हैं।

पूर्व पीसीसीएफ आईडी पांडे ने बताया कि उन्होंने 1966 में वन विभाग की सेवा शुरू की थी, लेकिन अपने पूरे कार्यकाल में ऐसा मामला कभी नहीं देखा, जिसमें दो नर बाघ आपसी संघर्ष में एक-दूसरे की जान ले लें।

बढ़ती बाघों की संख्या भी बन रही वजह

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अब नौकुचियाताल, सातताल, भीमताल, ओखलकांडा, धारी और पहाड़ी क्षेत्रों तक उनकी सक्रियता बढ़ चुकी है

ऐसे में सीमित टेरिटरी पर कब्जे को लेकर नर बाघों के बीच संघर्ष भी बढ़ रहे हैं। वन विभाग का मानना है कि छकाता रेंज की यह घटना भी टेरिटोरियल फाइट का ही नतीजा है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक और डीएनए जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

 

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