

भोंपूराम खबरी। पीपलपड़ाव रेंज के जंगल में हाथी ने चौकीदार को कुचलकर मार डाला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

मोहला गांव (बाजपुर) निवासी कश्मीर (60) बेटों बिंदर और गुरजिंदर के साथ पीपलपड़ाव रेंज के प्लॉट संख्या 24 में चौकीदारी करते थे।
सोमवार सुबह दस बजे कश्मीर अपनी झोपड़ी से लगभग 400 मीटर की दूरी पर जंगल में शौच के लिए गए थे। तभी । अचानक हाथी ने हमला कर उन्हें कुचल दिया। काफी समय तक जब वह नहीं लौटे तो बेटों ने उनकी खोजबीन की। जंगल में उनका शव बरामद हुआ। सूचना पर पीपलपड़ाव के रेंजर रूपनारायण गौतम और चौकी प्रभारी विजेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों म से जानकारी ली। डीएफओ यूसी तिवारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद विभाग से मिलने वाली आर्थिक तब सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
बाजपुर निवासी एक परिवार पीपलपड़ाव के प्लॉटों में चौकीदारी कर जीवन यापन कर रहा था। परिवार के सदस्यों को कभी इस बात इल्म नहीं था कि रोजी-रोटी की तलाश में एक दिन वे किसी अपने को ही खो देंगे। पिता की मौत से दोनों बेटे गमजदा हैं। पत्नी सहित अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बाजपुर तहसील के मोहल्ला गांव निवासी कश्मीर सिंह अपने दो बेटों के साथ पीपलपड़ाव के प्लॉट संख्या 24 में चौकीदारी करते थे। सोमवार सुबह बिंदर और गुरजिंदर सिंह पिता कश्मीर सिंह से विदा लेकर खेतों की देखरेख करने चले गए थे। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे पिता को आखिरी बार देख रहे हैं।
गुरजिंदर सिंह ने बताया कि वह पिछले नौ महीने से यहां चौकीदारी कर रहे हैं। परिवार में दोनों भाइयों की पत्नियों के अलावा मां हैं। इससे पहले वे बरेली के जंगल में चौकीदारी कर अपनी गुजर बसर करते थे। रूंधे गले से गुरजिंदर ने कहा कि आज तक जंगल में कभी किसी जानवर ने उन पर हमला नहीं किया।
वन से सटे खेतों में गेहूं-धान के बजाय मिर्च-अदरक लगाएं
प्रभागीय वन अधिकारी यूसी तिवारी ने बताया कि जनता को विभाग के साथ सहयोग करना चाहिए। जानवर गेहूं, धान और गन्ने की फसल की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। ऐसे में किसानों को जंगल के सटे खेतों में मिर्च, अदरक, हल्दी जैसी फसलों को लगाना चाहिए। इससे किसानों की आय तो बढ़ेगी ही, जंगली जानवर उनकी ओर आकर्षित भी नहीं होंगे। विभाग हाथियों के लिए जंगल के अंदर घास के मैदान और तालाबों को पुनर्जीवित कर रहा है, जिससे जानवर एक क्षेत्र में ही सीमित रहें और हमले न करें। जंगल के किनारे सोलर फेंसिंग • और खाई खोदने की तैयारी भी की जा रही हैं।
इन दिनों नर हाथियों का मीटिंग सीजन चल रहा है। इस वजह से नर हाथी ज्यादा आक्रामक हो रहे हैं। हाथी या किसी भी जंगली जानवर के सामने आने पर लोगों को
तेज आवाज निकालना चाहिए। जोरदार
शोर करना चाहिए। इससे जंगली जानवर का दिमाग भटक जाता हैं और वह पीछे हट जाता है। –
यूसी तिवारी, प्रभागीय वन अधिकारी
रुद्रपुर । तराई के जंगलों में हाथी के
हमले में इंसान की मौत की अक्सर घटनाएं सामने आती रही हैं। अधिकतर घटनाएं जंगल के भीतर चारा लेने या शौच गए लोगों के साथ हुईं हैं।
तराई के जंगलों में हाथियों की अच्छी तादाद है। पश्चिमी वृत्त में आने वाले पांच वन प्रभागों में वर्ष 2020 की गणना में 127 हाथी रिपोर्ट हुए थे। नेपाल से सटा होने की वजह से तराई के जंगलों में हाथियों की आवाजाही होती रही है।
ד
हाथियों की बढ़ती संख्या के बीच इन्सानों के टकराव की घटनाएं भी अक्सर सामने आती रही हैं। आबादी क्षेत्र में घटनाएं कम हुईं हैं। बीती 23 जनवरी को खटीमा के किलपुरा रेंज के जंगल में हाथी के हमले में एक युवक की मौत हुई थी। 22 जनवरी 2024 को इसी रेंज के जंगल में चारा लेने गए वन गूजर को हाथी में मार दिया था। दो जनवरी 2022 को इसी रेंज के जंगल में चारा लेने गए ग्रामीण को हाथी ने जमीन पर पटककर मार दिया था।
नौ फरवरी 2020 को पीपलपड़ाव रेंज के निगल्टिया खत्ता में गूजर को हाथी ने सूंड से उठाकर जमीन पर पटककर मार दिया था। 20 जनवरी 2019 को बौर खत्ते के पास एक चौकीदार के अलावा एक गूजर की हाथी के मामले में मौत हुई थी।