Friday, September 4, 2026

ज्ञान, विज्ञान और संस्कार का संगम बना “ज्ञान दीक्षा 2026” कार्यक्रम

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भोंपूराम खबरी,पंतनगर।  गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, नवाचार एवं जीवन मूल्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “ज्ञान दीक्षा 2026” कार्यक्रम का एक नई पहल के रूप में भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के मुख्य अतिथि, विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र, प्रख्यात चिंतक एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर शिवेंद्र कुमार कश्यप द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाला शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व क्षमता और जीवन मूल्यों को विकसित करने वाली एक सशक्त पाठशाला है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जीवन के चार वर्ष किसी भी विद्यार्थी के जीवन के “स्वर्णिम दिवस” होते हैं, जिनकी स्मृतियां जीवनभर ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करती हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज का युग केवल सूचना प्राप्त करने का नहीं, बल्कि ज्ञान को व्यवहार में उतारने और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का है। ज्ञान का अर्थ “इन्फॉर्मेशन” होता है, जबकि “दीक्षा” व्यक्ति को जीवन की दिशा और उद्देश्य प्रदान करती है, जिसके लिए गुरु और मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने विश्वविद्यालय जीवन में ऐसा वातावरण तैयार करें, जो उन्हें सकारात्मक सोच, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की ओर प्रेरित करे।

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय की संस्कृति, अनुशासन और शैक्षणिक परंपरा देशभर में एक अलग पहचान रखती है। यहां केवल शिक्षा ही नहीं दी जाती, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन के वास्तविक अनुभव, टीम भावना, संघर्ष की क्षमता और नेतृत्व के गुण भी सिखाए जाते हैं। उन्होंने अपने छात्र जीवन की यादें साझा करते हुए कहा कि पंतनगर में बिताए गए क्षण आज भी उनके जीवन की सबसे अनमोल धरोहर हैं।

मुख्य अतिथि ने विज्ञान, तकनीक, क्वांटम कंप्यूटिंग, कॉस्मिक एनर्जी, चेतना एवं आधुनिक शिक्षा व्यवस्था पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज का युवा तेजी से बदलती दुनिया में नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए उसे वैज्ञानिक सोच, शोध की भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध, पेटेंट, नवाचार एवं स्टार्टअप संस्कृति की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि विज्ञान और दर्शन एक-दूसरे के पूरक हैं। मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मविकास, जिम्मेदारी एवं मानवीय मूल्यों को आत्मसात करना भी है। उन्होंने “ज्ञान और विवेक”, “जीवन का विज्ञान एवं दर्शन”, “अस्तित्व का सार” तथा “स्वर्ग और पृथ्वी” जैसे विषयों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने ज्ञान और क्षमता का उपयोग समाज एवं राष्ट्र निर्माण के लिए करना चाहिए।

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म युवाओं के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन उनका सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपनी ऊर्जा और समय का सही दिशा में उपयोग करें तथा अनुशासन, ईमानदारी और आत्मविश्वास को जीवन का आधार बनाएं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए नियमों का पालन, सकारात्मक दृष्टिकोण, परिपक्व सोच और आत्ममूल्यांकन अत्यंत आवश्यक है। ज्ञान और विवेक का संतुलन ही व्यक्ति को सफल और श्रेष्ठ बनाता है। विज्ञान और कला का समन्वय समाज को नई दिशा प्रदान कर सकता है तथा मानव जीवन को अधिक समृद्ध और सार्थक बना सकता है।

डॉ. त्रिवेदी ने विद्यार्थियों को जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने तथा निरंतर सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि विचारों के निर्माण और व्यक्तित्व के विकास का केंद्र होता है।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. एस. के. कश्यप ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि “ज्ञान दीक्षा 2026” जैसी एक नई पहल विद्यार्थियों को नवीन सोच, प्रेरणा और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करेगी।

आथितियो का स्वागत कार्यवाहक कुलसचिव डॉ आर एस जादोन ने किया । डॉ. विपिन ध्यानी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने मुख्य अतिथि, अतिथियों एवं उपस्थित सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक एवं जीवन में नई ऊर्जा प्रदान करने वाला है। कार्यक्रम का संचालन सह अधिष्ठात्री छात्र कल्याण डॉ छाया शुक्ला ने किया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की नियंत्रक, निदेशक प्रशासन एवं अनुश्रवण, सभी महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशकगण शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारी एवं सभी डिग्री प्रोग्राम के अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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