भोंपूराम खबरी। देश में हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में तेल वितरण कंपनियों ने 29 रुपये की बढ़ोतरी कर महंगाई का बम फोड़ा था. ये तीन महीने में 14.2 किलोग्राम वाले LPG Cylinder की कीमत में दूसरी बढ़ोतरी थी. सिलेंडर महंगा होने के बाद अब सरकार ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका दिया है. इस सरकारी स्कीम के तहत मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की संख्या में बड़ी कटौती की गई है
इसके साथ ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, PMUY के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा. उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार रिफिल की खपत होती है, पहले PMUY लाभार्थियों को साल में 9 रिफिल पर DBT मिलता था.
9 नहीं, अब सिर्फ 4 सिलेंडर
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत जब तक लाभार्थियों के लिए रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 थी, जिसे कम करते हुए सरकार ने सिर्फ 4 कर दिया है. केंद्र सरकार के इस बड़े फैसले को लेकर अधिकारियों ने बताया कि ये कदम सहायता को वास्तविक औसत घरेलू खपत केअनुरूप बनाता है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा ने इस संबंध में कहा कि संशोधित पात्रता उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है।
2016 में शुरुआत, अब तक ऐसे घटी संख्या मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की थी और इसका उद्देश्य वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराना था. योजना की शुरुआत में इसके लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर दिए जाते थे. लेकिन फिर सरकार ने इस वार्षिक कोटे को कम करते 9 कर दिया था और अब इसे घटाकर सिर्फ चार करने का फैसला लिया गया है.
उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर पर सरकार सब्सिडी (LPG Cylinder Subsidy) भी देती है. इन्हें किफायती बनाए रखने के लिए सर ने मई 2022 में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलर्प.. सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की, जिसे अगले साल यानी अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया था. सरकार की ओर से दी जाने वाली ये एलपीजी सब्सिडी हर रिफिल खरीद के बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा की जाती है.
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों को देखें, तो सरकार ने 2022 से अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये दिए हैं. हाल ही में घरेलू खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, सरकारी तेल विपणन कंपनियां बेचे गए प्रत्येक 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं




