Saturday, September 5, 2026

प्रशासन के आश्वासन के बाद हुआ किसान सुखवंत सिंह अंतिम संस्कार

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भोंपूराम खबरी,काशीपुर ।ग्राम पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या से उपजा जनाक्रोश प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद शांत हुआ है। सोमवार को प्रशासन और मृतक के परिजनों के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता में तीन में से दो प्रमुख मांगों पर सहमति बन गई। इसके बाद परिजनों ने सुखवंत सिंह के शव का कड़ी सुरक्षा के बीच पैंगा स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया। उनकी अंतिम यात्र में उमड़े जनसैलाब और नम आंखों ने सिस्टम के प्रति अपनी नाराजगी और सुखवंत के प्रति संवेदना व्यक्त की। मामले में सीएम के कड़े रुख के बाद ही पुलिस महकमे में निलंबन की बड़ी कार्रवाई हुई है,

जिसमें थानाध्यक्ष आईटीआई और पूरी पैगा चौकी पर गाज गिरी है। सोमवार सुबह एसडीएम अभय प्रताप सिंह, एसपी स्वप्न किशोर सिंह और एडिशनल एसपी दीपक सिंह ने परिजनों व किसान नेताओं के साथ बंद कमरे में वार्ता की। किसान नेता जितेंद्र सिंह जीतू ने बताया कि सुखवंत से हुई 3 करोड़ 80 लाख रुपये की धोखाधड़ी में से 25 प्रतिशत रकम (लगभग 95 लाख) परिवार को प्राप्त हो चुकी है। शेष 75 प्रतिशत रकम की वसूली के लिए प्रशासन ने 19 जनवरी तक का समय माँगा है। परिजनों ने स्पष्ट किया है कि यदि 20 जनवरी को होने वाले ‘भोग’ कार्यक्रम से पहले पूरी रकम रिकवर नहीं हुई, तो वे हाईवे जाम करेंगे। दोषियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एसडीएम अभय प्रताप सिंह ने कहा कि यह एक अत्यंत दुखद घटना है और स्वयं मुख्यमंत्री इस पर नजर बनाए हुए हैं। दोषियों पर सख्त कार्रवाई और परिवार की आर्थिक क्षतिपूर्ति हमारी प्राथमिकता है। वहीं एसपी स्वप्न किशोर सिंह ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि जांच निष्पक्ष होगी और भ्रष्टाचार के आरोपों की भी गहनता से तफ्तीश की जाएगी। वहीं अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। चप्पे-चप्पे पर पीएसी और भारी पुलिस बल तैनात रहा। ग्रामीण और किसान संगठनों के नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे प्रशासन की हर हरकत पर नजर रख रहे हैं और यदि 19 जनवरी तक वादे पूरे नहीं हुए, तो आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।

बवाल की आशंका को लेकर पुलिस प्रशासन रहा अलर्ट

काशीपुर। किसान सुखवंत सिंह की मौत के मामले में किसान यूनियन से जुड़े नेताओं के चक्का जाम के ऐलान के चलते आज पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा। किसानों के प्रदर्शन और चक्का जाम की चेतावनी के बाद आईटीआई थाने को छावनी में तब्दील कर दिया गया। सुरक्षा के मद्देनजर 6 प्लाटून पीएसी, एक प्लाटून महिला पीएसी, सात इंस्पेक्टर, 17 सब-इंस्पेक्टर और विभिन्न थानों से भारी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात की गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले में किसान नेताओं से वार्ता कर आक्रोश को फिलहाल शांत कर दिया है। लेकिन मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। विपक्षी दल और स्थानीय लोग इस घटना की तुलना अंकिता भंडारी हत्याकांड से करते हुए सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। किसानों का कहना है कि जो प्रमुख मांगें हैं वो पूरी नहीं हुई तो उग्र आंदोलन होगा।

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