Saturday, September 5, 2026

डीएम व जिला आबकारी अधिकारी की जंग सीएम दरबार तक पहुंची

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भोंपूराम खबरी,देहरादून। लम्बे समय से शराब के महकमे में उलट पुलट टाइप चल रहा है। कुछ समय पूर्व आबकारी सचिव व आयुक्त हरि चंद सेमवाल की दून के डीएम सविन बंसल से ‘शराब’ पर ठन गयी। ऐसा दो बार हुआ।

एक बार डीएम ने जनता की मांग पर व्यस्त राजपुर रोड का शराब का ठेका सील कर दिया। ऊंची पहुंच का रौब दिखाते हुए शराब के ठेकेदार ने आबकारी आयुक्त सेमवाल से दुकान की सील खुलवा ली। डीएम ने फिर सील कर दिया। खूब झगड़ा हुआ। सरकारी चिठ्ठियां भी मीडिया की सुर्खियां बनी। शासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों की शराब की दुकान को लेकर चली ‘ ऐंठ’ ने खूब चर्चा बटोरी।

यह हैरतअंगेज शराब की दुकान की कहानी अभी ठंडी ही पड़ी थी कि एक और वाकया हो गया। बजट सत्र के आस पास जाखन, राजपुर रोड के एक रोमियो लेन बार में देर रात तक शराब परोसने की कहानी सामने आई।

डीएम बंसल ने रोमियो लेन बार सील कर दिया। खबर यह भी आयी कि इस बार के कनेक्शन नौकरशाही तक गहरे जुड़े हुए हैं। बार सील होते ही झगड़ा बड़ा। और फिर बड़े वाले डीएम पर भारी पड़े। और रोमियो लेन बार फिर से गुलजार हो उठा। लेकिन शराब और नौकरशाही के बीच के रिश्ते को लेकर काफी किरकिरी और जगहंसाई हुई।

अब चमोली डीएम व जिला आबकारी अधिकारी भिड़े

कुछ महीने पूर्व आबकारी विभाग के इन दोनों चर्चित मामलों के बाद चमोली जिले का ताजा मामला सुर्खियां बटोर रहा है।

दरअसल शराब के ठेकों के व्यवस्थापन को लेकर डीएम तिवारी ने आबकारी अधिकारी त्रिपाठी को बुलाया था ,लेकिन वे नहीं आये। यहीं से बात बिगड़ गयी।

इस मसले में सीधे तौर पर शराब ठेकों की गड़बड़ी से जुड़ा मामला सामने तो नहीं आया। लेकिन डीएम संदीप तिवारी और जिला आबकारी अधिकारी दुर्गेश्वर कुमार त्रिपाठी के बीच जारी जंग सीधे सीएम दरबार तक पहुंच गई।

जिला आबकारी अधिकारी ने तो सभी वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों को बायपास कर सीधे सीएम को चिठ्ठी लिख मारी। पत्र में आना दुखड़ा रोया। और कहा कि डीएम ने मेरे लिए अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया। और कैरियर तबाह करने की धमकी दी। मैं मानसिक रूप से परेशान हूँ।

उधर, चमोली जिले से यह भी खबर सामने आई है कि डीएम तिवारी ने मंगलवार को आबकारी कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। डीएम का कहना है कि शराब की दुकानों का आवंटन/व्यवस्थापन होना था। लिहाजा आबकारी अधिकारी के बैठक में नहीं आने पर कार्यालय का निरीक्षण किया तो वे गायब मिले।

इसके अलावा सहायक लेखाकार धीरज भट्ट, और कनिष्ठ सहायक भी कार्यालय में मौजूद नहीं थे। डीएम तिवारी ने जिला आबकारी अधिकारी व अन्य गायब दोनों कर्मियों का एक दिन का वेतन काटने के आदेश किये। और आबकारी अधिकारी त्रिपाठी की सर्विस ब्रेक करने के साथ ही वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी।

अब यह मसला सीधे चमोली से दून में सीएम दरबार तक पहुंच गया। जिला आबकारी अधिकारी ने सीधे सीएम को पत्र भेज न्याय की मांग की है। पत्र में लिखा है कि डीएम ने 18 मार्च औऱ फिर 31 मार्च को मेरे साथ दुर्व्यवहार किया । और कैरियर बर्बाद करने की बात भी कही।

यहां, यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या अधिकारी-कर्मचारी आचरण सेवा नियमावली के तहत क्या कोई जिले का अधिकारी सीधे सीएम को पत्र लिख सकता है। या फिर जिले के अधिकारी व कर्मचारी को अपने विभाग के सक्षम अधिकारी को अपना प्रार्थना पत्र देना चाहिए। आबकारी विभाग में जारी संग्राम के बीच यह सवाल भी मौजूं बना हुआ है।

चमोली के जिला आबकारी अधिकारी त्रिपाठी ने पत्र की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव आबकारी व आबकारी आयुक्त के सूचनार्थ भी भेजी है।

इस एपिसोड के बाद आबकारी अधिकारी एसोसिएशन ने डीएम संदीप तिवारी के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। बैठकों का दौर जारी है।

गौरतलब है कि इन दिनों प्रदेश में शराब की दुकानों के आवंटन और व्यवस्थापन को लेकर शासन, आबकारी विभाग व जिला प्रशासन में गहमागहमी बनी हुई है।

चमोली के मामले में सीधे तौर पर शराब के दुकानों का मामला तो सामने नहीं आया। लेकिन चर्चा है कि 31 मार्च को हुए मामले में कहीं न कहीं शराब की दुकानों से जुड़ी व्यवस्था का मसला ही जंग की मुख्य वजह बनी।

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