Friday, September 4, 2026

बचा खाना खाकर जीने वाले ‘कालू’ की मौत: पिटबुल के हमले ने मोहल्ले की इंसानियत को रुला दिया!!

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भोंपूराम खबरी, रूद्रपुर। नगर के आवास विकास क्षेत्र के बृहस्पति देव मंदिर मार्ग पर बीते सप्ताह एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे मोहल्ले को झकझोर दिया। इलाके में रहने वाले लोगों के बीच “कालू” नाम से पहचाना जाने वाला एक निराश्रित कुत्ता एक पालतू पिटबुल के हमले में मारा गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, काले रंग का यह शांत स्वभाव का श्वान वर्षों से इलाके में भटकता जरूर था, लेकिन उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया। वह आसपास के छोटे होटलों और ढाबों में बचा-खुचा खाना खाकर अपना पेट भरता था। धीरे-धीरे उसका मोहल्ले वालों से एक अनकहा रिश्ता बन गया था।

 

कुछ दिन पूर्व अचानक एक पालतू पिटबुल ने उस पर हमला कर दिया। बताया जाता है कि पिटबुल ने उसकी गर्दन पर कई बार काटा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कुछ ही मिनटों में उस बेबस श्वान ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

 

इलाके के एक होटल मालिक, जो अक्सर उसे रोटी खिलाते थे, इस घटना के बाद से बेहद व्यथित हैं। उन्होंने कहा, “वह बोल नहीं सकता था, पर उसकी आँखों में अपनापन था। वह किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता था। आज लगता है जैसे मोहल्ले का एक अपना चला गया।”

 

स्थानीय लोगों ने आबादी वाले क्षेत्रों में पिटबुल जैसी आक्रामक नस्ल के कुत्तों को पालने पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हमला किसी बच्चे या बुजुर्ग पर हो जाता, तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे। ज्ञात हो कि पूर्व में भी उक्त पिटबुल कई अन्य जानवर9न पर हमला बोल चुका है लेकिन इसके मालिक की दबंगई के चलते कोई कुछ बोल नहीं पाता।

 

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 2024 में कई “खतरनाक” मानी जाने वाली नस्लों, जिनमें पिटबुल भी शामिल है, के आयात, बिक्री और प्रजनन पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दी थी।

 

मोहल्ले के लोगों ने पशु क्रूरता निवारण समिति और स्थानीय प्रशासन से इस घटना का संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

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