Friday, September 4, 2026

गाजरघास जागरूकता उन्मूलन सप्ताह का प्रारंभ

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भोंपूराम खबरी,पंतनगर।  पंतनगर विश्वविद्यालय में गाजरघास ( _पार्थेनियम हिस्ट्रोफोरस_ ) जागरूकता एवं प्रबंधन सप्ताह का शुभारम्भ 16 अगस्त 2026 को परियोजनाधिकारी डा. एस.पी. सिंह की अगुवाई में नगला परिसर, बाजार एवं रेलवे स्टेशन सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता अभियान चलाकर आमजन को गाजरघास के दुष्प्रभावों एवं उसके प्रभावी प्रबंधन के बारे में जानकारी प्रदान की गई तथा प्रचार सामग्री का वितरण किया गया।
इसी क्रम में कार्यक्रम के दूसरे दिन गाजरघास जागरूकता एवं उन्मूलन सप्ताह का आयोजन न. ई. बोरलॉग फसल अनुसंधान केन्द्र में किया गया, जिसमें निदेशक शोध डा. एस.के. वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेे। कार्यक्रम में अन्य अतिथिगण अधिष्ठाता कृषि एवं विभागाध्यक्ष, सस्य विज्ञान विभाग डा. अनिल शुक्ला, संयुक्त निदेशक, फसल अनुसंधान केन्द्र डा. एन.के. सिंह, सह-निदेशक, डा. ए.पी. सिंह, फार्म निदेशक डा. अमित भटनागर, संयुक्त निदेशक, प्रजनक बीज उत्पादन केन्द्र डा. ए.एस. जीना, संयुक्त निदेशक मधुमक्खी अनुसंधान केन्द्र प्रमोद मल्ल, संयुक्त निदेशक पुष्प विज्ञान केन्द्र डा. वी.के. राव, संयुक्त निदेशक खन्ना फार्म डा. दिनेश कुमार सिंह, परियोजनाधिकारी डा. एस.पी. सिंह, पूर्व परियोजनाधिकारी डा. तेज प्रताप एवं इनके अतिरिक्त अन्य प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं, कृषि श्रमिक एवं खरपतवार परियोजना से संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम परियोजनाधिकारी डा. एस.पी. सिंह ने सभा में उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए गाजरघास के लगातार कृषि क्षेत्र में प्रकोप, मनुष्यों, जानवरों, वातावरण को दुष्प्रभावित करने के बारे मे विस्तृत जानकारी दी तथा गाजर घास से संबंधित चलचित्र भी दिखाया। संयुक्त निदेशक डा. एन.के. सिंह ने गाजरघास के नियंत्रण हेतु जैविक एवं समन्वित प्रबंधन उपायों को अपनाने तथा समाज में व्यापक जन-जागरूकता फैलाने का आहवाहन किया। अधिष्ठाता कृषि डा. अनिल शुक्ला ने बताया कि गाजरघास का एक पौधा हजारों की संख्या में बीज उत्पन्न कर सकता है, जिससे खेतों में इसका प्रकोप लगातार बढ़ता जाता है। अतः समय रहते इसके नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। संयुक्त निदेशक मधुमक्खी अनुसंधान केन्द्र डा. प्रमोद मल्ल ने सुझाव दिया कि गाजर घास के प्रति जागरूकता हमें अपने आस-पास की एक-एक कॉलोनियों को लक्ष्य बनाकर गाजर घास मुक्त बनाये।
मुख्य अतिथि डा. एस.के. वर्मा ने विश्वविद्यालय के सभी केन्द्रों एवं इकाइयों को गाजरघास मुक्त बनाने का संकल्प लेने तथा इस अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने पर बल दिया। उन्होंने वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों से अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में गाजरघास उन्मूलन एवं जन-जागरूकता गतिविधियों को निरंतर संचालित करने का आग्रह किया। कार्यक्रम के अंत में परियोजना अधिकारी डा. एस.पी. सिंह ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं एवं प्रतिभागियों का कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग हेतु धन्यवाद किया।

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