
भोंपूराम खबरी,पंतनगर। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के कृषि महाविद्यालय के सभागार में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ शिवेंद्र कुमार कश्यप द्वारा कृषि महाविद्यालय के संकाय सदस्यों को संबोधित किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के समग्र विकास, शोध संस्कृति को सशक्त बनाने, विद्यार्थियों की उपलब्धियों को बढ़ावा देने तथा संस्थागत सहयोग को मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के शैक्षणिक, व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत विकास को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एडवाइजर-एडवाइजी प्रणाली को मजबूत किया जाना आवश्यक है। शिक्षक एवं विद्यार्थियों के बीच मजबूत संबंध स्थापित होने से न केवल शैक्षणिक वातावरण बेहतर होगा बल्कि विद्यार्थियों का आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता एवं व्यक्तित्व विकास भी सुदृढ़ होगा। इस क्रम में प्रत्येक स्नातक विद्यार्थी के लिए पखवाड़े में कम से कम एक सलाहकार बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन, उपस्थिति, परीक्षा परिणाम, व्यवहार, कौशल विकास, इंटर्नशिप, सॉफ्ट स्किल्स, अनुसंधान रुचि तथा भविष्य की करियर संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही विद्यार्थियों को अपनी व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक समस्याओं को खुलकर साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि समय रहते उचित समाधान एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सके।

कुलपति ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा ही नहीं बल्कि मानसिक सहयोग, करियर काउंसलिंग तथा व्यक्तित्व विकास की भी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे सक्षम, नवाचारी एवं आत्मनिर्भर युवा तैयार करना है जो समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। मजबूत एडवाइजर-एडवाइजी प्रणाली विद्यार्थियों में अनुशासन, जिम्मेदारी एवं नेतृत्व क्षमता का विकास करेगी तथा उन्हें उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, शोध कार्य, उद्यमिता एवं रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
इस अवसर पर कुलपति ने सेंटर आफ एक्सीलेंस की स्थापना, आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच समन्वय तथा शोध परियोजनाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, स्टार्टअप संस्कृति, कृषि आधारित उद्यमिता एवं नवाचार आधारित गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर को एक “मॉडल कॉलेज” के रूप में विकसित करने की रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस मॉडल का उद्देश्य ऐसे शोध एवं प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देना है, जिनसे किसानों एवं विद्यार्थियों दोनों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हो सके। कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक एवं तकनीक आधारित समाधान विकसित करने पर बल दिया गया।
विश्वविद्यालय में एक आधुनिक “डेटा स्टोरेज एवं रिसर्च मैनेजमेंट सिस्टम” विकसित करने का भी उनके द्वारा सुझाव दिया गया जिसमें विश्वविद्यालय के समस्त शोध कार्यों, प्रकाशनों, प्रोजेक्ट्स एवं नवाचारों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। इससे शोध कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं उपयोगिता में वृद्धि होगी तथा भविष्य के शोधकर्ताओं को महत्वपूर्ण जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
बैठक में विश्वविद्यालय की भूमि के समुचित उपयोग के लिए योजना बनाने एवं संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर भी प्रकाश डाला। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रत्येक इंच भूमि महत्वपूर्ण है और उसका उपयोग शिक्षा, शोध, कृषि नवाचार एवं आय सृजन जैसी गतिविधियों के लिए प्रभावी ढंग से किया जाना चाहिए। इसके लिए व्यावसायिक मॉडल विकसित करने, कृषि आधारित उद्यम स्थापित करने तथा संस्थागत नेटवर्किंग को बढ़ावा देना होगा।
शोध प्रकाशनों, विद्यार्थियों की उपलब्धियों, उद्योगों से सहयोग एवं दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी से विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और अधिक मजबूत कर सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों, पूर्व छात्रों एवं विभिन्न संस्थानों के बीच निरंतर संवाद एवं सहभागिता से शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
कुलपति के उद्बोधन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना तथा शिक्षा, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करना था।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ रंजन श्रीवास्तव, प्राध्यापक द्वारा कुलपति जी का स्वागत किया। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ सुभाष चंद्र द्वारा कुलपति जी का धन्यवाद ज्ञापन किया गया।




