भोंपूराम खबरी,नैनीताल। रुद्रपुर के बहुचर्चित सड़क दुर्घटना एवं कथित मारपीट प्रकरण में उत्तराखंड हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पुलिस जांच में बड़ा और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। सीसीटीवी फुटेज, स्वतंत्र गवाहों, घायलों तथा शिकायतकर्ता के बयानों की गहनता से जांच करने के बाद पुलिस को पारस चुघ के खिलाफ किसी भी अपराध में संलिप्तता का कोई साक्ष्य नहीं मिला है। इसके बाद पुलिस ने विवेचना (जांच) में उनकी भूमिका को समाप्त कर दिया है। राज्य सरकार ने इस पूरी जांच रिपोर्ट की स्थिति हाईकोर्ट के समक्ष भी प्रस्तुत कर दी है।
घटनाक्रम की शुरुआत 7 अगस्त की रात काशीपुर रोड क्षेत्र में एक स्कूटी और स्कॉर्पियो कार के बीच हुई दुर्घटना से हुई थी। इस हादसे में अभिषेक और उसका साथी घायल हो गए थे। इसके अगले दिन यानी 8 अगस्त को कोतवाली रुद्रपुर में एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में सड़क दुर्घटना के अलावा यह भी गंभीर आरोप लगाया गया था कि एक्सीडेंट के बाद पारस चुघ अपने 10-12 अन्य साथियों के साथ मौके पर पहुंचे और घायलों के साथ मारपीट की। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने पारस चुघ समेत अन्य लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था।
खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद और गलत बताते हुए पारस चुघ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने याचिका दाखिल कर एफआईआर रद्द करने और अपनी गिरफ्तारी पर रोक की मांग की थी। मामले में सबसे बड़ा मोड़ 14 अगस्त को आया, जब पारस की तरफ से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में कैद है और उसकी फुटेज पुलिस के पास मौजूद है। इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को विवेचक (जांच अधिकारी) से पूरे घटनाक्रम पर स्पष्ट निर्देश प्राप्त करने तथा अगली सुनवाई 19 अगस्त तक सीसीटीवी फुटेज कोर्ट रिकॉर्ड पर पेश करने का सख्त आदेश दिया था।
हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद पुलिस ने उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से परीक्षण किया। इसके साथ ही स्वतंत्र गवाहों, घायलों और शिकायतकर्ता अंकित के बयानों का दोबारा विश्लेषण किया गया। पुलिस की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, कथित मारपीट के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं पाया गया।
पुलिस द्वारा दर्ज शिकायतकर्ता अंकित के बयान में खुद यह बात सामने आई कि जब पारस चुघ घटनास्थल पर पहुंचे, तब तक हादसे में घायल दोनों युवक अस्पताल के लिए रवाना हो चुके थे। शिकायतकर्ता के इस बयान ने यह साफ कर दिया कि पारस चुघ और घायलों की घटनास्थल पर एक ही समय मौजूदगी थी ही नहीं। ऐसे में मारपीट किए जाने के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।
पुलिस रिपोर्ट में यह भी साफ हो गया कि घायलों को आईं चोटें सिर्फ सड़क दुर्घटना की वजह से थीं। इस प्रकार एफआईआर में पारस चुघ और अन्य 10-12 युवकों पर लगे मारपीट के दावों की हवा निकल गई।पुलिस ने हाईकोर्ट के सामने अपनी स्टेटस रिपोर्ट रखते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पारस चुघ व उनके साथियों के खिलाफ कोई जुर्म साबित करने वाला सबूत नहीं मिला है, इसलिए पारस चुघ का नाम विवेचना से हटा दिया गया है और अब वे इस केस में आरोपी नहीं हैं। रुद्रपुर में गिरफ्तारी की मांग को लेकर हुए भारी विरोध और धरना-प्रदर्शनों के बीच पुलिस का यह निष्कर्ष पारस चुघ के लिए एक बहुत बड़ी राहत माना जा रहा है।
मामले में पारस चुघ की ओर से हाईकोर्ट में अधिवक्ता विपुल शर्मा, ललित शर्मा तथा अनमोल संधू ने पैरवी की। उन्होंने शुरुआत से ही इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और निष्पक्ष जांच के आधार पर सच्चाई सामने लाने पर जोर दिया था।




