भोंपूराम खबरी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पूर्व मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे आशीष (इन पर 2021 में लखीमपुर खीरी में चार लोगों की हत्या का आरोप है) गवाहों को डराने-धमकाने के कथित मामले में शामिल नहीं थे और न ही उन पर कोई चार्जशीट दाखिल की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को यह भी बताया गया कि इस मामले में सुनवाई अगले तीन महीनों में पूरी होने की संभावना है। पीठ ने सुनवाई में प्रगति और उसके सामने दाखिल नई स्थिति रिपोर्ट पर गौर करने के बाद आशीष मिश्रा की जमानत अर्जी पर सुनवाई टाल दी।
अब इस मामले की सुनवाई अगले महीने होगी।पीठ ने कहा कि अमनदीप सिंह नाम के व्यक्ति के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है और मामले का संज्ञान लिया गया है। जहां तक अजय मिश्रा, आशीष मिश्रा की भूमिका का सवाल है तो जांच से पता चला है कि वे कथित अपराध में शामिल नहीं थे। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में तीन अक्तूबर 2021 को किसानों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया। इसके बाद, नाराज किसानों ने कथित तौर पर एक चालक और भाजपा के दो कार्यकर्ताओं को पीट-पीटकर मार डाला था। इस हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई। मिश्रा और अन्य लोगों पर हिंसा की मुख्य घटना के गवाहों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया गया था।




