Friday, September 4, 2026

एक्शन: अब नहीं होगी निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली। नियम तोड़े तो समझो मान्यता रद्द

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भोंपूराम खबरी,नैनीताल।  उत्तराखंड के नैनीताल जिले में निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने ढंग से फीस वसूली पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने जिले के सभी निजी विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण और फीस वसूली को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

नए आदेशों के तहत अब अतिरिक्त शुल्क वसूलने पर रोक लगा दी गई है और पहले से वसूली गई अतिरिक्त राशि अभिभावकों की आगामी फीस में समायोजित करनी होगी।

प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ आर्थिक दंड, मान्यता निरस्तीकरण और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अब नहीं होगी मनमानी फीस वसूली

जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब निजी विद्यालय शिक्षण शुल्क (Tuition Fee) और परीक्षा शुल्क (Examination Fee) के अलावा अलग-अलग नामों से अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेंगे।

प्रवेश शुल्क (Admission Fee) केवल वास्तविक खर्च के आधार पर ही लिया जाएगा, जबकि अन्य सभी शुल्कों को समायोजित कर केवल विकास शुल्क (Development Fee) के रूप में रखा जाएगा। विकास शुल्क भी न्यूनतम होगा और इसके लिए अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) की स्वीकृति अनिवार्य होगी।

तीन साल में अधिकतम 10% ही बढ़ेगी फीस

जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार निजी विद्यालय तीन वर्षों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। इसके लिए भी विद्यालयों को पीटीए की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा पूरे शैक्षणिक सत्र में केवल चार मासिक परीक्षाएं, एक अर्द्धवार्षिक परीक्षा और एक वार्षिक परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने परीक्षा शुल्क की अधिकतम सीमा 600 रुपये निर्धारित की है, जबकि ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) शुल्क मात्र 1 रुपये तय किया गया है।

नए आदेशों के तहत निजी विद्यालयों को अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए मासिक, त्रैमासिक, छमाही और वार्षिक भुगतान का विकल्प देना होगा।

किसी भी अभिभावक को एकमुश्त पूरी फीस जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा।

जिला प्रशासन ने आदेश दिया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में वसूली गई अतिरिक्त फीस का समायोजन 1 जुलाई 2026 से शुरू होने वाली फीस में किया जाएगा।

नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर होगी कड़ी कार्रवाई

प्रशासन ने साफ किया है कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), सीबीएसई बायलॉज तथा अन्य प्रचलित नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नियम तोड़ने पर-

आरटीई अधिनियम के तहत 1 लाख रुपये तक का जुर्माना

सीबीएसई बायलॉज के तहत 5 लाख रुपये तक का आर्थिक दंड

विद्यालय की मान्यता रद्द

एनओसी निरस्त

• अन्य वैधानिक कार्रवाई

की जा सकती है।

डीएम ललित मोहन रयाल का सख्त संदेश

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि “शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निजी विद्यालयों को शासन के निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। यदि कोई विद्यालय मनमानी फीस वसूलेगा या आदेशों की अनदेखी करेगा तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

 

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