भोंपूराम खबरी। पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के बाद असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड कर दिया गया है। 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में वकीलों के साथ हुई झड़प के बाद दो अधिकारियों के तबादले के विरोध में सोमवार को एसीपी वशिष्ठ ने पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों का साथ दिया।
शुरुआत में लगभग 100 पुलिसकर्मी गेट नंबर 1 के बाहर इकट्ठा हुए और वशिष्ठ और शाहदरा पुलिस स्टेशन के एसएचओ, इंस्पेक्टर अरुण कुमार को उनके पदों पर वापस लाने की मांग की। बाद में यह विरोध प्रदर्शन और बड़ा हो गया, जिसमें लगभग 500 पुलिसकर्मियों ने पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक में हिस्सा लिया।
ये तबादले उस घटना के बाद हुए जिसमें शाहदरा पुलिस स्टेशन में हाथापाई के दौरान एक वकील के सिर में कथित तौर पर गंभीर चोट लग गई थी। इसके बाद जिला अदालत के वकीलों ने हड़ताल शुरू कर दी थी। तबादले के आदेश जारी होने के बाद 28 अक्टूबर को वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली, लेकिन इस फैसले से पुलिसकर्मियों के बीच काफी नाराजगी पैदा हो गई।
वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात के बाद भी प्रदर्शन जारी था
प्रदर्शनकारियों ने अदालतों में पुलिसकर्मियों के साथ होने वाले बर्ताव, जांच के दौरान वकीलों की ओर से डाले जाने वाले कथित दबाव और शिकायतों के सुलझाने के लिए एक व्यवस्था की जरूरत को लेकर चिंता जताई। वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात के बाद भी पुलिसकर्मी मुख्यालय के बाहर अपना प्रदर्शन जारी रखे हुए थे, जबकि कुछ लोगों ने इस बात की आशंका जताई कि प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
आखिर पूरा विवाद क्या है?
23 अक्टूबर को एक घटना हुई, जब रोहताश नगर में खड़ी एक मोटरसाइकिल ने एक सैलून का रास्ता रोक दिया। सैलून की मालकिन शीतल ठाकुर और उनके पति राहुल ठाकुर ने बताया कि उन्होंने बाइक खड़ी करने वाले व्यक्ति से उसे हटाने के लिए कहा था।
शीतल की बहन श्वेता भारती के अनुसार, यह बातचीत बहस में बदल गई। श्वेता ने उस घटना को याद करते हुए बताया, “उन्होंने कहा, ‘यह तुम्हारे बाप की सड़क नहीं है’।” यह घटना सुबह करीब 11 बजे हुई। श्वेता का आरोप है कि शाम करीब 4:30 बजे वकीलों का एक समूह वापस सैलून आया, वहां तोड़फोड़ की और शीतल के साथ मारपीट की, जो आठ महीने की गर्भवती हैं।
परिवार ने पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया और शिकायत दर्ज कराने के लिए शाहदरा पुलिस स्टेशन गए। हालांकि, श्वेता का दावा है कि उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बजाय, परिवार से लिखित शिकायत देने को कहा गया, जो उन्होंने दे दी।
श्वेता के अनुसार, उसी समय दो वकील पुलिस स्टेशन में घुस आए और उनके पति और देवर राहुल के साथ मारपीट करने लगे। उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन वे दोनों लगातार मारपीट करते रहे। परिवार का आरोप है कि वकीलों की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया, जबकि उनकी शिकायत पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।




